सुप्रीम कोर्ट हेट स्पीच पर सख्त टिप्पणी, नेताओं को सोच सुधारने की नसीहत
सुप्रीम कोर्ट हेट स्पीच मामले में मंगलवार को अहम सुनवाई हुई। अदालत ने नेताओं और संवैधानिक पदों पर बैठे लोगों को भाषण देने से पहले अपनी सोच सुधारने की सलाह दी। सुप्रीम कोर्ट हेट स्पीच सुनवाई के दौरान कहा गया कि नफरत भरे भाषण समाज में विभाजन पैदा करते हैं और भाईचारे को कमजोर करते हैं।
मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ ने स्पष्ट किया कि राजनीतिक दल वैचारिक मुद्दों पर चुनाव लड़ सकते हैं। हालांकि, आपसी सम्मान और संवैधानिक नैतिकता का पालन अनिवार्य है। अदालत ने कहा कि भाषण से पहले विचार आते हैं, इसलिए विचारों को संवैधानिक मूल्यों के अनुरूप बनाना जरूरी है।
यह टिप्पणी असम के मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा के कथित भाषणों को लेकर दायर याचिका की सुनवाई के दौरान आई। याचिकाकर्ताओं ने आरोप लगाया कि एक वीडियो में खास समुदाय को निशाना बनाया गया। अदालत ने सुझाव दिया कि यदि दिशा-निर्देश की मांग है तो सभी दलों को शामिल करते हुए व्यापक याचिका दायर की जाए।
जस्टिस बी.वी. नागरत्ना और जस्टिस जॉयमाल्य बागची ने भी कहा कि पहले से जारी दिशा-निर्देशों का पालन राजनीतिक दलों को ही करना होगा। सुप्रीम कोर्ट हेट स्पीच पर यह टिप्पणी लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा की दिशा में अहम मानी जा रही है।
Jai Sharma | Suryoday Samachar
FAQ
प्रश्न 1: सुप्रीम कोर्ट हेट स्पीच मामले में अदालत ने क्या कहा?
अदालत ने नेताओं से भाषण से पहले सोच सुधारने और भाईचारा बढ़ाने की अपील की।
प्रश्न 2: यह मामला किससे जुड़ा है?
यह मामला असम सीएम हिमंत बिस्वा सरमा के कथित भाषण से जुड़ी याचिका पर आधारित है।
प्रश्न 3: क्या नए दिशा-निर्देश जारी हुए?
अदालत ने व्यापक याचिका दायर करने की सलाह दी, लेकिन तत्काल नए दिशा-निर्देश जारी नहीं किए।
