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यह चित्र एक सुपर-अर्थ ग्रह को दर्शाता है जो अपने नजदीकी तारे के चारों ओर घूम रहा है, जहां मोटा वातावरण और चमकदार सतह दिखाई दे रही है।
विज्ञान

आकाशगंगा में बढ़ रहे सुपर-अर्थ ग्रह, क्यों हैं ये वैज्ञानिकों के लिए खास?

By दुर्गेश शर्मा
February 18, 2026 2 Min Read
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सुपर-अर्थ ग्रह आज खगोल विज्ञान की दुनिया में सबसे ज्यादा चर्चा का विषय बने हुए हैं। मिल्की वे आकाशगंगा में बड़ी संख्या में सुपर-अर्थ ग्रह खोजे जा चुके हैं। ये ग्रह आकार में पृथ्वी से बड़े और नेपच्यून से छोटे होते हैं। वैज्ञानिक मानते हैं कि सुपर-अर्थ ग्रह हमारी आकाशगंगा के सबसे आम ग्रहों में शामिल हैं। सुपर-अर्थ ग्रह का द्रव्यमान पृथ्वी से लगभग 2 से 10 गुना तक हो सकता है। हालांकि नाम से लगता है कि ये पृथ्वी से बेहतर होंगे, लेकिन ऐसा जरूरी नहीं है। कुछ सुपर-अर्थ ग्रह चट्टानी होते हैं, जबकि कुछ पर मोटा गैसीय वातावरण पाया जाता है। कई सुपर-अर्थ ग्रह अपने तारे के बहुत करीब होते हैं, जहां तापमान बेहद ज्यादा होता है। 2004 में Gliese 876 d की खोज ने सुपर-अर्थ ग्रहों की नई श्रेणी को पहचान दी। बाद में Kepler Space Telescope ने हजारों बाह्यग्रह खोजे, जिनमें बड़ी संख्या सुपर-अर्थ ग्रह की थी। 2015 में खोजा गया Kepler-452b और 2016 में मिला Proxima Centauri b जीवन की संभावना के लिए चर्चा में रहे। James Webb Space Telescope अब सुपर-अर्थ ग्रहों के वातावरण का अध्ययन कर रहा है। वैज्ञानिक जलवाष्प, मीथेन और कार्बन डाइऑक्साइड जैसे संकेत खोज रहे हैं। सुपर-अर्थ ग्रहों की खोज ने ब्रह्मांड को देखने का नजरिया बदल दिया है। अब वैज्ञानिक मानते हैं कि जीवन के संकेत हमारी कल्पना से ज्यादा सामान्य हो सकते हैं।

Jai Sharma | Suryoday Samachar

FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले सवाल)

प्रश्न 1: सुपर-अर्थ ग्रह क्या होते हैं?
उत्तर: सुपर-अर्थ ग्रह ऐसे बाह्यग्रह हैं जिनका आकार और द्रव्यमान पृथ्वी से बड़ा लेकिन नेपच्यून से छोटा होता है।

प्रश्न 2: क्या सुपर-अर्थ ग्रह पर जीवन संभव है?
उत्तर: कुछ सुपर-अर्थ ग्रह हैबिटेबल जोन में हैं, जहां तरल पानी की संभावना हो सकती है।

प्रश्न 3: हमारे सौर मंडल में सुपर-अर्थ ग्रह क्यों नहीं है?
उत्तर: वैज्ञानिक मानते हैं कि ग्रह निर्माण की प्रक्रिया और बृहस्पति जैसे बड़े ग्रहों के प्रभाव से ऐसा हुआ।

Tags:

Jai SharmaKepler-452bNASAProxima Centauri bSuryoday Samacharअंतरिक्ष विज्ञानबाह्यग्रहसुपर-अर्थ ग्रह
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दुर्गेश शर्मा

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