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जर्मनी में मिला आर्कियोप्टेरिक्स का जीवाश्म, जिसकी चोंच और खोपड़ी की संरचना आधुनिक पक्षियों से मिलती-जुलती है।
विज्ञान

उड़ान की ऊर्जा का राज | आर्कियोप्टेरिक्स के मुख संरचना पर नई खोज

By दुर्गेश शर्मा
February 20, 2026 2 Min Read
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करीब 15 करोड़ साल पहले धरती पर मौजूद प्राचीन पक्षी Archaeopteryx आज भी वैज्ञानिकों के लिए रहस्य बना हुआ है। हालिया शोध में आर्कियोप्टेरिक्स के मुख संरचना को लेकर चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है। विशेषज्ञों का मानना है कि उसकी चोंच और जीभ की बनावट उसे भोजन को अधिक कुशल तरीके से खाने में मदद करती थी, जिससे उड़ान के लिए जरूरी ऊर्जा मिलती थी।

अध्ययन में पाया गया कि मुंह की छत पर छोटे उभार थे, जो आधुनिक पक्षियों की तरह भोजन पकड़ने में सहायक रहे होंगे। इसके अलावा, जीभ की हड्डी अधिक लचीली थी। चोंच के सिरे पर नसों के लिए छोटे चैनल भी मिले। ये संकेत देते हैं कि आर्कियोप्टेरिक्स के मुख संरचना केवल साधारण नहीं, बल्कि ऊर्जा-संतुलन के लिए विकसित थी।

विशेषज्ञों का कहना है कि उड़ान अधिक कैलोरी मांगती है। इसलिए भोजन तंत्र का कुशल होना जरूरी था। हालांकि, कुछ वैज्ञानिक मानते हैं कि उड़ान और मुख संरचना के सीधे संबंध पर अभी और शोध की जरूरत है। यह खोज पक्षियों के विकास की कहानी में एक नई कड़ी जोड़ती है और बताती है कि डायनासोर से पक्षी बनने की प्रक्रिया कितनी जटिल थी।

Jai Sharma | Suryoday Samachar

FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न)

प्रश्न 1: आर्कियोप्टेरिक्स क्या था?
यह एक प्राचीन जीव था, जिसे डायनासोर और पक्षी के बीच की कड़ी माना जाता है।

प्रश्न 2: आर्कियोप्टेरिक्स के मुख संरचना क्यों महत्वपूर्ण है?
यह बताती है कि उसकी चोंच और जीभ भोजन को कुशलता से संभालती थीं, जिससे उड़ान के लिए ऊर्जा मिलती थी।

प्रश्न 3: क्या इससे उड़ान का विकास सिद्ध होता है?
यह एक मजबूत परिकल्पना है, लेकिन पुष्टि के लिए और शोध जरूरी है।

Tags:

ArchaeopteryxJai SharmaSuryoday Samacharआर्कियोप्टेरिक्सजीवाश्मपक्षियों का विकासपेलियोन्टोलॉजी
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दुर्गेश शर्मा

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