डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने Online Gaming Law को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए मंगलवार को केंद्र सरकार से विस्तृत जवाब मांगा। अदालत ने कहा, “भारत एक अजीब देश है, जहां खिलाड़ी खेलना चाहते हैं और यही उनकी आय का स्रोत है।” सुप्रीम कोर्ट की यह टिप्पणी उस समय आई जब एक याचिकाकर्ता ने कहा कि वह एक शतरंज खिलाड़ी है और उसकी आजीविका ऑनलाइन गेमिंग से जुड़ी है।

Online Gaming Law को लेकर दायर याचिकाओं में कहा गया है कि यह अधिनियम कौशल-आधारित खेलों पर भी प्रतिबंध लगाता है, जो संविधान के अनुच्छेद 19(1)(जी) के तहत मिलने वाले अधिकार का उल्लंघन है। याचिकाकर्ताओं का कहना है कि सरकार को जुए और सट्टेबाजी वाले प्लेटफॉर्म्स को नियंत्रित करना चाहिए, न कि कौशल-आधारित गेमिंग को। न्यायमूर्ति जेबी पार्डीवाला और केवी विश्वनाथन की पीठ ने केंद्र को निर्देश दिया कि वह मुख्य याचिका पर एक व्यापक जवाब दाखिल करे। अब इस मामले की अगली सुनवाई 26 नवंबर को होगी।

Suryoday Samachar के अनुसार, भारत में ऑनलाइन गेमिंग उद्योग तेजी से बढ़ रहा है और लाखों लोग इसे अपने रोजगार का साधन बना चुके हैं। सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला देश में गेमिंग सेक्टर की दिशा तय कर सकता है।


FAQ: ऑनलाइन गेमिंग कानून पर सुप्रीम कोर्ट

प्रश्न 1: सुप्रीम कोर्ट ने ऑनलाइन गेमिंग कानून पर क्या कहा?
उत्तर: कोर्ट ने कहा कि भारत एक अजीब देश है जहां खिलाड़ी खेलना चाहते हैं और यही उनकी आय का साधन है।

प्रश्न 2: अगली सुनवाई कब होगी?
उत्तर: इस मामले की अगली सुनवाई 26 नवंबर को तय की गई है।

प्रश्न 3: याचिकाकर्ताओं की मुख्य दलील क्या है?
उत्तर: उनका कहना है कि ऑनलाइन गेमिंग कानून कौशल-आधारित खेलों पर गलत तरीके से प्रतिबंध लगाता है।

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