प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अयोध्या में रामलला की प्राण-प्रतिष्ठा की प्रथम वर्षगांठ के अवसर पर देशवासियों को शुभकामनाएं दीं। इस मौके पर पीएम मोदी ने अपने एक्स (पूर्व ट्विटर) अकाउंट पर एक वीडियो भी साझा किया। उन्होंने लिखा, “अयोध्या में रामलला की प्राण-प्रतिष्ठा की प्रथम वर्षगांठ पर समस्त देशवासियों को बहुत-बहुत शुभकामनाएं। यह दिव्य-भव्य राम मंदिर हमारी संस्कृति और अध्यात्म की महान धरोहर है।” पीएम मोदी ने विश्वास जताया कि यह मंदिर विकसित भारत के संकल्प को पूरा करने में प्रेरणा बनेगा।

सीएम योगी और अन्य नेताओं की शुभकामनाएं

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी इस खास मौके पर सोशल मीडिया पर पोस्ट किया। उन्होंने लिखा, “हम चाकर रघुवीर के… जय श्री राम।” डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने भी पीएम मोदी के पोस्ट को रीशेयर करते हुए लिखा, “असंख्य राम भक्तों को श्री राम जन्मभूमि मंदिर में प्रभु श्री रामलला की प्राण-प्रतिष्ठा के एक वर्ष पूर्ण होने पर हार्दिक बधाई व शुभकामनाएं।”

रामलला के दरबार को फूलों से सजाया गया

रामलला की प्राण-प्रतिष्ठा की पहली वर्षगांठ के मौके पर अयोध्या में वार्षिक उत्सव का आयोजन किया जा रहा है। यह उत्सव 11 जनवरी से 13 जनवरी तक चलेगा। इस अवसर पर रामलला के दरबार को विशेष रूप से फूलों से सजाया गया है। मंदिर परिसर में दिव्य वातावरण का अनुभव करने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं।

तीन दिनों का महोत्सव

इस वार्षिक उत्सव के दौरान कई धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन किया जा रहा है। रामलीला का मंचन भी उत्सव का मुख्य आकर्षण होगा। आयोजन समिति ने बताया कि तीन दिनों तक चलने वाले इस महोत्सव में वीवीआईपी पास निरस्त रहेंगे और दर्शन का समय भी बढ़ा दिया गया है ताकि अधिक श्रद्धालु रामलला के दर्शन कर सकें।

धार्मिक अनुष्ठान और रामलीला का आयोजन

उत्सव के दौरान मंदिर में कई विशेष पूजा-अर्चनाएं की जा रही हैं। इसके साथ ही धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन किया जा रहा है। रामलीला का मंचन भी श्रद्धालुओं के लिए एक प्रमुख आकर्षण होगा। मंदिर प्रशासन ने इस अवसर पर सुरक्षा व्यवस्था भी कड़ी कर दी है ताकि श्रद्धालु सुरक्षित और आरामदायक माहौल में उत्सव का आनंद ले सकें।

अयोध्या में रामलला की प्राण-प्रतिष्ठा की पहली वर्षगांठ पूरे धूमधाम से मनाई जा रही है। पीएम मोदी और सीएम योगी ने इस अवसर पर देशवासियों को शुभकामनाएं दीं। इस उत्सव ने न केवल धार्मिक महत्व को रेखांकित किया है बल्कि यह भारत के सांस्कृतिक और आध्यात्मिक मूल्यों का प्रतीक भी है।

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