“सोमवार को भारतीय शेयर बाजार में भारी गिरावट देखने को मिली। सेंसेक्स 1,048.90 अंक या 1.36 प्रतिशत की गिरावट के साथ 76,330.01 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 345.55 अंक या 1.47 प्रतिशत की गिरावट के साथ 23,085.95 पर बंद हुआ। इस गिरावट के चलते निवेशकों को करीब 12 लाख करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। बाजार में गिरावट का मुख्य कारण वैश्विक बाजारों में बिकवाली, क्रूड ऑयल की बढ़ती कीमतें और विदेशी पूंजी का बहिर्वाह रहा।”

पीएसयू बैंक, मेटल और रियलिटी सेक्टर में भारी बिकवाली

कारोबार के दौरान पीएसयू बैंक, मेटल, ऑटो और फार्मा सेक्टर में भारी बिकवाली देखी गई। रियलिटी सेक्टर में 6 फीसदी से अधिक की गिरावट दर्ज की गई। बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, मजबूत अमेरिकी पेरोल डेटा के चलते ब्याज दरों में कटौती की संभावना कम हो गई है, जिससे डॉलर मजबूत हुआ और बॉन्ड यील्ड में वृद्धि हुई। इसका असर भारतीय शेयर बाजार पर भी पड़ा।

निफ्टी ने 23,000 का स्तर बनाए रखा

एलकेपी सिक्योरिटीज के रूपक डे ने कहा कि निफ्टी के पिछले स्विंग लो से नीचे जाने के बाद बाजार में मंदी का संकेत मिला है। हालांकि, निफ्टी ने 23,000 के स्तर को बनाए रखा है। अगर निफ्टी इस स्तर से ऊपर बना रहता है, तो बाजार में सुधार की संभावना हो सकती है।

टॉप गेनर्स और लूजर्स की सूची

सेंसेक्स पैक में जोमैटो, पावर ग्रिड, टाटा स्टील, एनटीपीसी, टाटा मोटर्स और एमएंडएम जैसे बड़े शेयरों में गिरावट रही। दूसरी ओर, एक्सिस बैंक, टीसीएस, इंडसइंड बैंक और हिंदुस्तान यूनिलीवर लिमिटेड टॉप गेनर्स में शामिल रहे।

एफआईआई और डीआईआई गतिविधियां

विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफआईआई) ने लगातार छठे दिन शुद्ध विक्रय किया। 10 जनवरी को एफआईआई ने 2,254.68 करोड़ रुपये की इक्विटी बेची। इसके विपरीत, घरेलू संस्थागत निवेशकों (डीआईआई) ने 3,961.92 करोड़ रुपये की इक्विटी खरीदी।

भारतीय शेयर बाजार में आई इस गिरावट से निवेशकों को बड़ा नुकसान हुआ है। बाजार में सुधार के लिए निफ्टी को 23,000 के स्तर को बनाए रखना जरूरी है। आने वाले दिनों में बाजार की दिशा वैश्विक संकेतकों और घरेलू घटनाक्रमों पर निर्भर करेगी।

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