“देशभर में लोगों को किफायती दरों पर दवाइयां उपलब्ध कराने के लिए प्रधानमंत्री जन औषधि योजना चलाई जा रही है। इस योजना का उद्देश्य आम जनता को कम कीमत पर उच्च गुणवत्ता वाली जेनेरिक दवाएं प्रदान करना है। इसी कड़ी में सातवें जन औषधि दिवस के मौके पर दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने दिल्ली में जन औषधि केंद्रों की संख्या बढ़ाने की घोषणा की।“
सीएम रेखा गुप्ता ने अशोक विहार स्थित जन औषधि केंद्र का दौरा किया और वहां उपलब्ध सुविधाओं का जायजा लिया। उन्होंने इस अवसर पर कहा कि दिल्ली में अधिक से अधिक जन औषधि केंद्र खोले जाएंगे ताकि राजधानी के लोगों को सस्ती और गुणवत्तापूर्ण दवाएं मिल सकें।
क्या है प्रधानमंत्री जन औषधि योजना?
प्रधानमंत्री जन औषधि योजना (PMBJP) भारत सरकार की एक महत्वपूर्ण पहल है, जिसका उद्देश्य लोगों को बाजार में महंगी दवाओं की जगह सस्ती और उच्च गुणवत्ता वाली जेनेरिक दवाएं उपलब्ध कराना है। यह योजना देशभर में लागू की गई है और इसका लाभ लाखों लोग उठा रहे हैं।
इस योजना के अंतर्गत जन औषधि केंद्र खोले जाते हैं, जहां दवाइयों की कीमत बाजार में उपलब्ध ब्रांडेड दवाइयों की तुलना में 50% से 90% तक कम होती है।
जन औषधि केंद्रों के विस्तार की घोषणा
सातवें जन औषधि दिवस के अवसर पर मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि दिल्ली सरकार नियमों के अनुसार जितने संभव हो, उतने जन औषधि केंद्र खोलेगी। उनका कहना था कि पिछली सरकारें इस योजना से दूरी बनाए रहीं, क्योंकि इसमें “प्रधानमंत्री” शब्द जुड़ा था। लेकिन उनकी सरकार दिल्ली की जनता के हित में इस योजना को बड़े स्तर पर लागू करेगी।
उन्होंने कहा कि ये केंद्र गरीब और मध्यम वर्ग के लोगों के लिए बहुत फायदेमंद साबित हो रहे हैं। यहां मिलने वाली सस्ती दवाओं से दिल्ली की जनता को सीधा लाभ मिलेगा।
जन औषधि केंद्रों में मिलने वाली दवाओं के फायदे
- 90% तक सस्ती दवाइयां – यहां मिलने वाली दवाइयों की कीमत बाजार की ब्रांडेड दवाइयों की तुलना में बहुत कम होती है।
- गुणवत्ता में कोई कमी नहीं – ये दवाएं पूरी तरह से प्रमाणित और मान्यता प्राप्त होती हैं।
- हर जरूरी दवा उपलब्ध – इन केंद्रों पर जीवन रक्षक दवाइयों से लेकर सामान्य बीमारियों की दवाएं उपलब्ध होती हैं।
- बड़े ब्रांड्स का विकल्प – लोग महंगी दवाओं की जगह इन्हीं सस्ती दवाओं का इस्तेमाल कर सकते हैं, जिससे उनकी जेब पर भार कम पड़ेगा।
- देशभर में सुविधा – यह योजना सिर्फ दिल्ली में ही नहीं बल्कि पूरे देश में लागू है, जिससे लाखों लोग इसका लाभ उठा रहे हैं।
दिल्ली सरकार क्यों बढ़ा रही है जन औषधि केंद्रों की संख्या?
1. महंगी दवाइयों का बोझ कम होगा
दिल्ली में रहने वाली बड़ी आबादी महंगी दवाइयों का खर्च नहीं उठा पाती। इस वजह से सरकार ने अधिक जन औषधि केंद्र खोलने का निर्णय लिया है।
2. गरीब और मध्यम वर्ग को राहत
दिल्ली में कई लोग बीपी, डायबिटीज, हृदय रोग, श्वसन संबंधी रोग जैसी बीमारियों से पीड़ित हैं। इन बीमारियों में दवाइयों का खर्च बहुत ज्यादा होता है। जन औषधि केंद्र खुलने से इन लोगों को सस्ती दवाएं मिलेंगी और उनका जीवन आसान होगा।
3. सरकार का बड़ा कदम
मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि उनकी सरकार दिल्ली में हर संभव जगह पर जन औषधि केंद्र खोलने के लिए प्रतिबद्ध है।
जन औषधि दिवस क्यों मनाया जाता है?
हर साल 7 मार्च को जन औषधि दिवस मनाया जाता है। इस दिन को मनाने का उद्देश्य इस योजना के प्रति जागरूकता बढ़ाना और अधिक से अधिक लोगों को इसका लाभ दिलाना है।
इस साल के जन औषधि दिवस पर दिल्ली सरकार ने बड़ा ऐलान किया और बताया कि अब जन औषधि केंद्रों की संख्या और बढ़ाई जाएगी, जिससे दिल्ली के हर नागरिक को सस्ती दवाइयां मिल सकें।
कैसे खोल सकते हैं जन औषधि केंद्र?
अगर कोई भी व्यक्ति जन औषधि केंद्र खोलना चाहता है, तो वह इस योजना के लिए आवेदन कर सकता है। इसके लिए भारत सरकार के जन औषधि पोर्टल पर ऑनलाइन आवेदन करना होगा।
जन औषधि केंद्र खोलने की शर्तें:
- आवेदक के पास किसी भी मान्यता प्राप्त संस्थान से फार्मेसी की डिग्री होनी चाहिए।
- केंद्र खोलने के लिए कम से कम 120 वर्ग फुट का स्थान जरूरी है।
- सरकार इस योजना के तहत स्टार्टअप सपोर्ट और वित्तीय सहायता भी देती है।
प्रधानमंत्री जन औषधि योजना एक क्रांतिकारी पहल है, जिससे लोगों को सस्ती और उच्च गुणवत्ता वाली दवाइयां मिल रही हैं। दिल्ली सरकार द्वारा अधिक जन औषधि केंद्र खोलने की योजना से दिल्ली की जनता को काफी लाभ मिलेगा।
अगर आप भी महंगी दवाइयों के खर्च से परेशान हैं, तो अपने नजदीकी जन औषधि केंद्र पर जाएं और इस योजना का लाभ उठाएं।
