पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने जैव ईंधन के क्षेत्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रयासों को सराहा, जो भारत में एक नई क्रांति ला रहे हैं। पुरी ने इस पहल को पर्यावरण-अनुकूल, स्वच्छ ऊर्जा और ग्रामीण विकास के लिए महत्वपूर्ण बताया। उनकी सराहना का कारण यह था कि भारत ने जैव ईंधन के क्षेत्र में बड़ी सफलता हासिल की है, और हाल ही में नामीबिया ने ग्लोबल बायोफ्यूल अलायंस (GBA) में शामिल होकर इस दिशा में भारत की नेतृत्व क्षमता की पुष्टि की।

पुरी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर लिखा, “नामीबिया जीबीए में शामिल हो गया है। स्वच्छ ऊर्जा की दिशा में भारत की पहल और ग्लोबल बायोफ्यूल अलायंस फैमिली का विस्तार, वसुधैव कुटुम्बकम के मंत्र पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दूरदर्शिता का एक और प्रमाण है।”

प्रधानमंत्री मोदी की दूरदर्शिता: जैव ईंधन की दिशा में बदलाव

हरदीप सिंह पुरी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की दूरदर्शिता की सराहना की, जिन्होंने जैव ईंधन को भारत की विकास यात्रा में एक महत्वपूर्ण हिस्सा बना दिया। पुरी ने कहा, “प्रधानमंत्री मोदी के प्रयासों ने भारत में जैव ईंधन के माध्यम से बदलाव की एक नई क्रांति ला दी है। यह स्वच्छ और हरित ईंधन गाँवों से लेकर शहरों तक लोगों के जीवन को बदल रहा है और बेहतर बना रहा है।”

जैव ईंधन का उत्पादन मुख्यतः कृषि अपशिष्ट, अनाज या खराब अनाज से होता है, जिससे न केवल पर्यावरण में सुधार होता है, बल्कि यह ऊर्जा के एक स्वच्छ और सस्ता स्रोत भी बनता है। पुरी ने यह भी कहा कि यह ईंधन किसानों की आय में सुधार कर रहा है और ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर पैदा कर रहा है।

जैव ईंधन का व्यापक प्रभाव: किसानों से लेकर ग्रामीण रोजगार तक

हरदीप सिंह पुरी ने आगे कहा कि जैव ईंधन के विकास से किसानों को न केवल आय में सुधार हो रहा है, बल्कि यह ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर भी उत्पन्न कर रहा है। उन्होंने कहा, “किसानों की आय बढ़ाने के साथ-साथ, यह ईंधन ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर भी पैदा कर रहा है।”

भारत में जैव ईंधन ब्लेंडिंग इस वर्ष 20 प्रतिशत तक पहुंच गई है, जबकि 2014 में यह केवल 1.4 प्रतिशत था। इसका मतलब यह है कि जैव ईंधन अब भारत की ऊर्जा आवश्यकताओं का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुका है।

जैव ईंधन उत्पादन और वैश्विक प्रभाव

भारत आज दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा जैव ईंधन उत्पादक देश बन चुका है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, इथेनॉल ब्लेंडिंग पहल ने पिछले दस वर्षों में किसानों की आय में वृद्धि की है, और साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार भी सृजित किए हैं। जैव ईंधन कार्यक्रम के परिणामस्वरूप, 1.75 करोड़ पेड़ लगाने के बराबर CO2 उत्सर्जन में कमी आई है, और इसने 85,000 करोड़ रुपये की विदेशी मुद्रा की बचत भी की है।

भारत की जैव ईंधन पहल न केवल पर्यावरण की सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण है, बल्कि यह ग्रामीण विकास, रोजगार सृजन और ऊर्जा सुरक्षा की दिशा में भी एक महत्वपूर्ण कदम है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत ने जैव ईंधन के माध्यम से एक नई क्रांति की शुरुआत की है, जो न केवल भारतीय नागरिकों के जीवन में सुधार ला रही है, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी स्वच्छ ऊर्जा की दिशा में एक मजबूत उदाहरण प्रस्तुत कर रही है।

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