जम्मू-कश्मीर एक बार फिर प्राकृतिक आपदा से जूझ रहा है। रविवार सुबह कठुआ जिले के जंगलोट इलाके में बादल फटने की घटना हुई, जिसमें चार लोगों की मौत हो गई। अचानक हुई तेज बारिश और पानी का सैलाब आस-पास के इलाकों में घुस गया और कई जगहों पर भारी नुकसान की खबर सामने आई।

स्थानीय प्रशासन के अनुसार, बादल फटने से रेलवे ट्रैक, राष्ट्रीय राजमार्ग और कठुआ पुलिस स्टेशन को गंभीर क्षति पहुंची है।

राहत और बचाव कार्य जारी

केंद्रीय मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह ने घटना की जानकारी मिलते ही कठुआ के एसएसपी शोभित सक्सेना से बातचीत की। उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा कि कठुआ में बादल फटने से चार लोगों की मौत हुई है और रेलवे ट्रैक सहित कई जगहें प्रभावित हुई हैं।

नागरिक प्रशासन, सेना और अर्धसैनिक बल राहत व बचाव कार्य में जुटे हैं। प्रभावित इलाकों से लोगों को सुरक्षित स्थानों पर भेजा जा रहा है।

मुख्यमंत्री ने जताया दुख

मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से भी इस घटना पर गहरा दुख व्यक्त किया गया। संदेश में कहा गया कि कठुआ जिले के जोध खड्ड और जुथाना इलाके में भूस्खलन और क्षति की खबर मिली है। मुख्यमंत्री ने मृतकों के परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त की और घायलों के जल्द स्वस्थ होने की कामना की।

उन्होंने प्रशासन को तत्काल राहत, बचाव और निकासी उपाय करने के निर्देश दिए।

हाल ही में किश्तवाड़ में भी बादल फटा

यह पहली बार नहीं है जब जम्मू-कश्मीर में बादल फटने की घटना हुई हो। हाल ही में किश्तवाड़ जिले के चिशोती इलाके में भी बादल फटने से भारी तबाही मची थी। अचानक आई बाढ़ से श्री मचैल यात्रा प्रभावित हुई थी और प्रशासन ने यात्रा को रोक दिया था।

स्थानीय पुलिस, एसडीआरएफ, एनडीआरएफ और अन्य एजेंसियां उस समय भी बड़े पैमाने पर राहत और बचाव कार्य में लगी हुई थीं।

बादल फटने से होने वाला नुकसान

बादल फटने का असर ग्रामीण इलाकों पर

कठुआ में बादल फटने से कई ग्रामीण इलाके प्रभावित हुए हैं। तेज बारिश और पानी का बहाव खेतों और घरों तक पहुंच गया। लोगों को अपने घर छोड़कर सुरक्षित स्थानों पर जाना पड़ा।

रेलवे और राष्ट्रीय राजमार्ग पर असर

इस आपदा का सबसे बड़ा असर रेलवे ट्रैक और राष्ट्रीय राजमार्ग पर पड़ा है। कई जगहों पर ट्रैक बह गए और राजमार्ग पर यातायात ठप हो गया।

पुलिस स्टेशन और सरकारी ढांचे को नुकसान

कठुआ थाना परिसर भी पानी और मलबे से प्रभावित हुआ। इससे प्रशासनिक कामकाज पर भी असर पड़ा है।

प्रशासन की तैयारी और भविष्य की चुनौतियां

जम्मू-कश्मीर में हर साल मानसून के दौरान बादल फटने की घटनाएं सामने आती हैं। विशेषज्ञ मानते हैं कि जलवायु परिवर्तन और अनियंत्रित निर्माण कार्य इस तरह की आपदाओं को और गंभीर बना रहे हैं।

राज्य सरकार ने प्रशासन को निर्देश दिया है कि प्रभावित परिवारों को तत्काल सहायता दी जाए और भविष्य में इस तरह की घटनाओं से निपटने के लिए ठोस रणनीति बनाई जाए।

लोगों में दहशत का माहौल

कठुआ जिले के लोग इस आपदा से डरे हुए हैं। ग्रामीणों का कहना है कि अचानक आई बाढ़ ने उन्हें संभलने का मौका ही नहीं दिया। कई घरों में रखा सामान बह गया और सड़कें पूरी तरह से क्षतिग्रस्त हो गईं।

कठुआ में बादल फटने से मिली सीख

इस घटना ने एक बार फिर यह साबित कर दिया कि जम्मू-कश्मीर प्राकृतिक आपदाओं की चपेट में आने वाला क्षेत्र है। राज्य और केंद्र सरकार दोनों को मिलकर ऐसी रणनीति बनानी होगी जिससे आने वाले समय में जान-माल का नुकसान कम से कम हो।

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