देश में जारी LPG संकट के बीच “गैस क्राइसिस चार्ज” चर्चा का बड़ा विषय बन गया है। बेंगलुरु के एक कैफे ने नींबू पानी के बिल पर 5% अतिरिक्त गैस क्राइसिस चार्ज लगाकर लोगों को चौंका दिया। यह मामला सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हुआ और यूजर्स ने इस पर सवाल उठाने शुरू कर दिए।
रिपोर्ट के अनुसार, ग्राहक ने दो मिंट लेमोनेड ऑर्डर किए थे, जिनकी कुल कीमत ₹358 थी। कैफे ने पहले 5% डिस्काउंट दिया, लेकिन बाद में GST के साथ 5% गैस क्राइसिस चार्ज जोड़ दिया। इससे अंतिम बिल ₹374 हो गया। इस गैस क्राइसिस चार्ज को लेकर लोगों ने कहा कि नींबू पानी बनाने में गैस का उपयोग नहीं होता, फिर यह शुल्क क्यों लिया जा रहा है।
विशेषज्ञों का मानना है कि गैस संकट के कारण होटल और कैफे के खर्च बढ़े हैं। हालांकि, इस तरह सीधे ग्राहकों पर गैस क्राइसिस चार्ज डालना सही है या नहीं, इस पर बहस जारी है। सरकार ने हाल ही में कमर्शियल LPG की सप्लाई फिर शुरू कर दी है, जिससे राहत मिलने की उम्मीद है।
Jai Sharma | Suryoday Samachar
FAQ – गैस क्राइसिस चार्ज
Q1. गैस क्राइसिस चार्ज क्या है?
यह एक अतिरिक्त शुल्क है, जो व्यवसाय बढ़ती गैस लागत के कारण ग्राहकों से लेते हैं।
Q2. क्या यह चार्ज जरूरी है?
यह व्यवसाय पर निर्भर करता है, लेकिन इसे स्पष्ट रूप से बताना जरूरी है।
Q3. क्या यह कानूनी है?
अगर बिल में पारदर्शिता है, तो इसे लागू किया जा सकता है।
Q4. विवाद क्यों हुआ?
क्योंकि नींबू पानी जैसी चीज पर भी गैस क्राइसिस चार्ज लगाया गया।

