देश में वंदे मातरम विवाद एक बार फिर चर्चा में है। ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) ने केंद्र सरकार के उस फैसले का विरोध किया है, जिसमें वंदे मातरम को राष्ट्रगान जैसा दर्जा देने और सरकारी व शैक्षणिक संस्थानों में इसके अनिवार्य गायन की बात कही गई है। बोर्ड ने इसे संविधान और धार्मिक स्वतंत्रता के खिलाफ बताया है।AIMPLB के राष्ट्रीय प्रवक्ता डॉ. एसक्यूआर इलियास ने कहा कि वंदे मातरम के कुछ अंतराओं में देवी-देवताओं की स्तुति की गई है।
उनका कहना है कि यह इस्लाम के तौहीद सिद्धांत के विपरीत माना जाता है। इसी कारण मुस्लिम संगठनों ने इस फैसले पर आपत्ति जताई है।वहीं, सरकार समर्थकों का कहना है कि वंदे मातरम भारत की आजादी और राष्ट्रभक्ति का प्रतीक है। उनका मानना है कि इसका सम्मान सभी नागरिकों को करना चाहिए। इस बीच वंदे मातरम विवाद को लेकर राजनीतिक बहस भी तेज हो गई है।संवैधानिक विशेषज्ञों का कहना है कि धार्मिक स्वतंत्रता और राष्ट्रीय प्रतीकों के बीच संतुलन बनाए रखना जरूरी है। इसी वजह से यह मुद्दा लगातार चर्चा में बना हुआ है।
FAQ
Q1. वंदे मातरम विवाद क्यों बढ़ा?
केंद्र सरकार के नए फैसले के बाद इस मुद्दे पर बहस तेज हुई है।
Q2. AIMPLB ने क्या कहा?
बोर्ड ने फैसले को असंवैधानिक और धार्मिक स्वतंत्रता के खिलाफ बताया।
Q3. क्या वंदे मातरम राष्ट्रगान है?
नहीं, ‘जन गण मन’ भारत का राष्ट्रगान है जबकि ‘वंदे मातरम’ राष्ट्रीय गीत है।
Prem Chand | Suryoday Samachar

