एक डिजिटल स्क्रीन पर AI जनरेटेड वीडियो दिख रहा है, जिसके कोने में स्पष्ट “AI Generated” लेबल और मेटाडेटा संकेत मौजूद है।एआई जनरेटेड वीडियो पर लगाया गया अनिवार्य डिजिटल लेबल।

डिजिटल दुनिया में तेजी से बढ़ रहे डीपफेक और फर्जी वीडियो को रोकने के लिए AI कंटेंट लेबल नियम लागू कर दिए गए हैं। अब यदि कोई फोटो, वीडियो या ऑडियो आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से बनाया गया है, तो उस पर स्पष्ट लेबल लगाना अनिवार्य होगा। साथ ही सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को शिकायत मिलने के 3 घंटे के भीतर आपत्तिजनक कंटेंट हटाना होगा।

सरकार का मानना है कि AI कंटेंट लेबल नियम से ऑनलाइन पारदर्शिता बढ़ेगी। इससे यूजर को यह समझने में आसानी होगी कि कौन सा कंटेंट असली है और कौन सा एआई से तैयार किया गया है।

नए नियमों के तहत एआई से बने कंटेंट में डिजिटल मार्कर या मेटाडेटा भी जोड़ा जाएगा। यह जानकारी जांच एजेंसियों को असली स्रोत तक पहुंचने में मदद करेगी। यदि कोई व्यक्ति लेबल हटाने की कोशिश करता है, तो इसे गैर-कानूनी माना जाएगा। यह कदम इंटरनेट को सुरक्षित और जवाबदेह बनाने की दिशा में अहम है। विशेषज्ञों का कहना है कि इससे चुनावी माहौल में फैलने वाली गलत जानकारी और इम्पर्सनेशन के मामलों में कमी आएगी।

Jai Sharma | Suryoday Samachar

FAQ

1. AI कंटेंट लेबल नियम क्या है?
यह नियम एआई से बने कंटेंट पर लेबल लगाना अनिवार्य करता है।

2. कंटेंट हटाने की समय सीमा क्या है?
सोशल मीडिया कंपनियों को 3 घंटे के भीतर कार्रवाई करनी होगी।

3. क्या लेबल हटाना अपराध है?
हाँ, लेबल या मेटाडेटा हटाना गैर-कानूनी माना जाएगा।

4. क्या यूजर को डिक्लेरेशन देना होगा?
हाँ, अपलोड करते समय बताना होगा कि कंटेंट एआई से बना है या नहीं।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *