“अमरनाथ यात्रा 2025 अब तक श्रद्धालुओं के लिए बेहद सफल रही है। यात्रा के 18वें दिन तक कुल 3.07 लाख तीर्थयात्रियों ने बाबा बर्फानी के पवित्र गुफा में दर्शन कर लिए हैं। अभी भी यात्रा के 20 दिन शेष हैं, जिससे संख्या में और वृद्धि की उम्मीद है।“
3 जुलाई से शुरू होकर 9 अगस्त तक चलेगी यात्रा
इस वर्ष यात्रा की शुरुआत 3 जुलाई 2025 को हुई थी और इसका समापन 9 अगस्त को होगा। हर दिन हजारों श्रद्धालु दो मार्गों — बालटाल और पहलगाम — से पवित्र गुफा तक पहुंच रहे हैं।
सोमवार को 3,791 श्रद्धालु रवाना हुए
आज सोमवार को भगवती नगर यात्री निवास, जम्मू से 3,791 तीर्थयात्रियों का नया जत्था रवाना हुआ। जत्थे को दो काफिलों में भेजा गया:
- पहला काफिला: सुबह 3:33 बजे, 52 वाहनों में 1,208 श्रद्धालु, बालटाल कैंप के लिए
- दूसरा काफिला: सुबह 4:06 बजे, 96 वाहनों में 2,583 श्रद्धालु, पहलगाम कैंप के लिए
उपराज्यपाल मनोज सिन्हा ने किया बालटाल शिविर का दौरा
जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा, जो कि श्री अमरनाथ श्राइन बोर्ड (SASB) के अध्यक्ष भी हैं, ने रविवार को बालटाल शिविर का निरीक्षण किया। उन्होंने:
- यात्रियों के साथ लंगर में भोजन किया
- यात्रा व्यवस्थाओं की समीक्षा की
- सुरक्षा इंतज़ामों पर संतोष जताया
- तीर्थयात्रियों से संवाद किया
सुरक्षा व्यवस्था अत्यधिक सख्त और मजबूत
इस बार की यात्रा अतिसंवेदनशील मानी जा रही है। विशेषकर पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद सुरक्षा को और कड़ा कर दिया गया है:
- सेना, बीएसएफ, सीआरपीएफ, SSB और स्थानीय पुलिस की भारी तैनाती
- 180 अतिरिक्त CAPF कंपनियों की सुरक्षा ड्यूटी
- हर ट्रांजिट कैंप और दोनों बेस कैंप्स को कवर किया गया है
- किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए Quick Reaction Teams (QRTs) तैयार
यात्रा मार्ग: बालटाल और पहलगाम
बालटाल मार्ग
- दूरी: 14 किलोमीटर
- विशेषता: एक दिन में यात्रा संभव, लेकिन कठिन और खड़ी चढ़ाई
- विशेष सुविधा: निकटता और तीव्र वापसी
पहलगाम मार्ग
- दूरी: 46 किलोमीटर
- पड़ाव: चंदनवाड़ी → शेषनाग → पंचतरणी
- यात्रा अवधि: लगभग 3-4 दिन
- विशेषता: सुंदर प्राकृतिक नज़ारे, लेकिन लंबा रास्ता
हेलीकॉप्टर सेवा इस बार स्थगित
सुरक्षा कारणों से इस वर्ष किसी भी मार्ग पर हेलीकॉप्टर सेवा उपलब्ध नहीं कराई गई है। सभी श्रद्धालुओं को पैदल यात्रा करनी पड़ रही है।
अमरनाथ यात्रा का धार्मिक महत्त्व
अमरनाथ यात्रा हिंदू धर्म की सबसे पवित्र तीर्थयात्राओं में मानी जाती है। मान्यता है कि इसी गुफा में भगवान शिव ने माता पार्वती को अमरता और शाश्वत जीवन का रहस्य बताया था।
बर्फ से निर्मित शिवलिंग को देखने के लिए हर साल लाखों श्रद्धालु इस कठिन यात्रा पर निकलते हैं।
तीर्थयात्रियों के लिए विशेष प्रबंध
- मेडिकल टीम्स और इमरजेंसी हेल्पलाइन
- Langar सेवा दोनों मार्गों में
- डिजिटल रजिस्ट्रेशन और RFID ट्रैकिंग
- हर बेस कैंप पर हेल्थ चेकअप सेंटर
