देश में पारंपरिक पेशों को लेकर नई चर्चा शुरू हो गई है। संसद की एक स्थायी समिति ने Caste Based Profession Names Change की सिफारिश की है। इस प्रस्ताव का उद्देश्य उन पेशों के नाम बदलना है जो सीधे जाति से जुड़े माने जाते हैं।
रिपोर्ट के अनुसार मोची, नाई, कुम्हार और धोबी जैसे शब्द ऐतिहासिक रूप से जाति आधारित पहचान से जुड़े रहे हैं। समिति का मानना है कि इन नामों की वजह से कई बार सामाजिक रूढ़ियां और भेदभाव की भावना मजबूत होती है। इसलिए Caste Based Profession Names Change के तहत पेशों को कौशल आधारित और आधुनिक नाम देने का सुझाव दिया गया है।
प्रस्ताव के मुताबिक मोची को जूता कारीगर या फुटवियर विशेषज्ञ कहा जा सकता है। नाई को पर्सनल केयर सर्विस प्रोवाइडर, कुम्हार को मिट्टी उत्पाद निर्माता और धोबी को लॉन्ड्री व क्लीनिंग सर्विस प्रोवाइडर जैसे नाम दिए जा सकते हैं।
समिति का कहना है कि इस बदलाव से युवाओं के बीच इन पेशों के प्रति सकारात्मक सोच बढ़ेगी। साथ ही पारंपरिक कारीगरों को सम्मानजनक पहचान मिल सकेगी।
इस मामले में MSME मंत्रालय को सुझाव दिया गया है कि विशेषज्ञों और राज्यों से सलाह लेकर नई ट्रेड सूची तैयार की जाए। माना जा रहा है कि Caste Based Profession Names Change की पहल प्रधानमंत्री विश्वकर्मा योजना जैसे कार्यक्रमों में भी शामिल हो सकती है।
रिपोर्ट के अनुसार इस कदम से समाज में कौशल आधारित पहचान को बढ़ावा मिलेगा।
Durgesh Sharma | Suryoday Samachar
FAQ
1. Caste Based Profession Names Change क्या है?
यह एक प्रस्ताव है जिसमें पारंपरिक जाति आधारित पेशों के नाम बदलकर उन्हें कौशल आधारित पहचान देने की सिफारिश की गई है।
2. किन पेशों के नाम बदलने की बात कही गई है?
मोची, नाई, कुम्हार और धोबी जैसे पेशों के नाम बदलने का सुझाव दिया गया है।
3. नाम बदलने का उद्देश्य क्या है?
इसका उद्देश्य जाति आधारित पहचान कम करना और पेशों को सम्मानजनक व आधुनिक पहचान देना है।
4. यह बदलाव कौन लागू कर सकता है?
संसदीय समिति ने MSME मंत्रालय को इस दिशा में नीति बनाने की सिफारिश की है।

