Suryoday Samachar | नई दिल्ली – देश में बढ़ते वायु प्रदूषण को देखते हुए सरकार और वायु गुणवत्ता प्रबंधन आयोग (सीएक्यूएम) ने कोयले के उपयोग पर रोक लगाने की दिशा में ठोस कदम उठाने शुरू कर दिए हैं। यह पहल खासतौर पर दिल्ली-एनसीआर और उससे सटे राज्यों में लागू करने की तैयारी है, ताकि हवा की गुणवत्ता में सुधार लाया जा सके।
सीएक्यूएम ने सुप्रीम कोर्ट को अवगत कराया है कि दिल्ली के आसपास के गैर-एनसीआर क्षेत्रों में भी उद्योगों से निकलने वाला धुआं राजधानी की हवा को प्रभावित करता है। इसी वजह से अब हरियाणा, उत्तर प्रदेश, राजस्थान और पंजाब के कई औद्योगिक शहरों में कोयले के उपयोग पर रोक लगाने की योजना बनाई जा रही है। इन राज्यों से इसके लिए तीन महीने के भीतर कार्ययोजना मांगी गई है।
आयोग के अनुसार, स्टील मिल, सीमेंट प्लांट, सिरेमिक यूनिट, कागज मिल, कपड़ा उद्योग और ईंट भट्टे जैसे क्षेत्रों में अब भी कोयले का बड़े पैमाने पर उपयोग हो रहा है। इन उद्योगों को चरणबद्ध तरीके से प्राकृतिक गैस, बिजली, बायोमास और जैव ईंधन जैसे स्वच्छ विकल्प अपनाने होंगे।
दिल्ली-एनसीआर में पहले ही हजारों उद्योगों को स्वच्छ ईंधन में बदला जा चुका है। इससे साफ है कि कोयले के उपयोग पर रोक से प्रदूषण कम करने में वास्तविक मदद मिल सकती है। आने वाले समय में यह नीति देश की पर्यावरण रणनीति का अहम हिस्सा बन सकती है।
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FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले सवाल)
प्रश्न 1: कोयले के उपयोग पर रोक क्यों जरूरी है?
उत्तर: कोयला जलने से भारी मात्रा में प्रदूषक निकलते हैं, जो वायु गुणवत्ता को खराब करते हैं।
प्रश्न 2: किन राज्यों में यह रोक लागू हो सकती है?
उत्तर: हरियाणा, उत्तर प्रदेश, राजस्थान और पंजाब के कई क्षेत्रों में।
प्रश्न 3: कोयले के विकल्प कौन से हैं?
उत्तर: प्राकृतिक गैस, बिजली, बायोमास और जैव ईंधन।
प्रश्न 4: इसका आम लोगों को क्या फायदा होगा?
उत्तर: हवा साफ होगी और स्वास्थ्य संबंधी जोखिम कम होंगे।

