दिल्ली-एनसीआर में मंगलवार सुबह से हो रही बारिश ने जहां भीषण गर्मी से राहत दी, वहीं वायु प्रदूषण के स्तर को भी चौंकाने वाली हद तक घटा दिया है।
बारिश की वजह से हवा इतनी शुद्ध हो गई है कि कई इलाकों में एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 50 से नीचे आ गया, जिसे “अति उत्तम” श्रेणी में गिना जाता है।

कहां-कहां कितनी स्वच्छ हुई हवा? CPCB के आंकड़ों से जानें

31 जुलाई 2025 को AQI के प्रमुख आंकड़े इस प्रकार रहे:

  • अलीपुर (Delhi): AQI 28
  • मेजर ध्यानचंद स्टेडियम: AQI 38
  • बवाना: AQI 36
  • नरेला और नेहरू नगर: AQI 48
  • इंदिरापुरम (गाजियाबाद): AQI 31
  • नोएडा सेक्टर-62 और सेक्टर-1: AQI 34

यह डेटा केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (CPCB) और भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के संयुक्त निगरानी से प्राप्त हुआ है।

IMD का अनुमान: बारिश का दौर जारी रहेगा

मौसम विभाग के मुताबिक:

  • 31 जुलाई से 5 अगस्त तक बादल छाए रहेंगे
  • 1 से 3 अगस्त तक तेज बारिश और गरज-चमक की संभावना
  • अधिकतम तापमान: 34-35 डिग्री सेल्सियस
  • न्यूनतम तापमान: 24-26 डिग्री सेल्सियस
  • ह्यूमिडिटी (नमी): 85-95% के बीच

AQI ‘अति उत्तम’ क्यों मायने रखता है?

AQI 0-50 को “अति उत्तम” माना जाता है। इसका मतलब:

  • हवा पूरी तरह से स्वस्थ और प्रदूषण मुक्त है
  • बुजुर्ग, बच्चे और अस्थमा मरीज भी सांस लेने में पूर्णतः सुरक्षित
  • पर्यावरण, वनस्पति और जीव-जंतुओं पर कोई नकारात्मक असर नहीं

बारिश से PM2.5 और PM10 जैसे हानिकारक कण धुल जाते हैं, जिससे हवा अधिक साफ हो जाती है।

दूसरी ओर ट्रैफिक और जलभराव बना सिरदर्द

जहां एक ओर बारिश ने लोगों को गर्मी और प्रदूषण से राहत दी, वहीं दूसरी ओर:

  • कई क्षेत्रों में जलभराव
  • अंडरपास बंद
  • देर से चलती बसें और ट्रेनें
  • ऑफिस और स्कूल जाने वाले घंटों जाम में फंसे

प्रमुख प्रभावित क्षेत्र:

  • मथुरा रोड
  • आईटीओ
  • दिलशाद गार्डन
  • रोहिणी सेक्टर
  • गुरुग्राम के NH8 और मानेसर

प्रशासन के लिए बड़ी चुनौती

नगर निगम और ट्रैफिक पुलिस को:

  • जलभराव वाली सड़कों से पानी निकालने के लिए पंपिंग स्टेशनों को सक्रिय करना पड़ा
  • ट्रैफिक को डायवर्ट करने के लिए अस्थायी रूट बनाए
  • सफाईकर्मियों की अतिरिक्त ड्यूटी लगाई गई

लोगों की प्रतिक्रिया

कुछ स्थानीय निवासियों ने कहा:

“बारिश ने गर्मी से राहत दी है, लेकिन अगर नालों की सफाई समय पर होती तो जलभराव नहीं होता।”

पर्यावरणविदों की राय: यह है स्थायी बदलाव का संकेत

विशेषज्ञों के अनुसार:

  • मानसून के दौरान ऐसी “क्लीन एयर विंडो” साल में 3-4 बार आती है
  • यह दर्शाता है कि यदि प्रदूषण स्रोतों को नियंत्रित किया जाए तो हवा को शुद्ध रखना संभव है

सरकार को चाहिए कि वह मानसून के बाद भी वायु गुणवत्ता बनाए रखने के लिए रणनीति बनाए।

  • दिल्ली-NCR की हवा फिलहाल “अति उत्तम” स्थिति में है — यह एक स्वागतयोग्य बदलाव है
  • लेकिन ट्रैफिक जाम और जलभराव ने यह भी दिखाया कि शहरी तैयारी अभी भी अधूरी है

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