डिजिटल डेस्क, नई दिल्ली। दिल्ली हाई कोर्ट जुर्माना मामले में अदालत ने सख्त रुख अपनाते हुए एक किरायेदार पर ₹1 लाख का जुर्माना लगाया। अदालत ने पाया कि याचिकाकर्ता अरुण सूद ने खुद को संपत्ति का मालिक बताकर न्यायालय को गुमराह किया। न्यायमूर्ति मिनी पुष्करणा की पीठ ने कहा कि यह “कानूनी प्रक्रिया का दुरुपयोग” है और इस तरह की याचिकाओं से अदालत का कीमती समय बर्बाद होता है। न्यायालय के अनुसार, याचिकाकर्ता के खिलाफ पहले ही तीस हजारी कोर्ट से बेदखली का आदेश जारी किया गया था। इसके बावजूद उसने अदालत में गलत तथ्य रखे। जब अदालत ने पूछा, तो उसने इसे “टाइपिंग गलती” बताया, जिसे कोर्ट ने अस्वीकार कर दिया। न्यायमूर्ति ने कहा कि हाई कोर्ट जुर्माना जैसे फैसले उन लोगों के लिए चेतावनी हैं जो अदालत का दुरुपयोग अपने निजी स्वार्थ के लिए करते हैं। अदालत ने आदेश दिया कि ₹1 लाख की राशि हाई कोर्ट बार क्लर्क एसोसिएशन के खाते में चार सप्ताह के भीतर जमा की जाए। न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि अगर धनराशि समय पर जमा नहीं की गई तो इसे वसूली योग्य बकाया माना जाएगा।
FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न)
प्रश्न 1: दिल्ली हाई कोर्ट जुर्माना क्यों लगाया गया?
उत्तर: क्योंकि याचिकाकर्ता ने खुद को मालिक बताकर अदालत को गुमराह किया, जबकि वह किरायेदार था।
प्रश्न 2: जुर्माने की राशि कितनी तय की गई है?
उत्तर: अदालत ने ₹1 लाख का जुर्माना लगाया है।
प्रश्न 3: यह राशि कहाँ जमा करनी होगी?
उत्तर: यह धनराशि दिल्ली हाई कोर्ट बार क्लर्क एसोसिएशन के खाते में जमा करनी होगी।
