भारत सरकार ने सेमीकंडक्टर डिजाइन क्षमताओं को बढ़ाने के उद्देश्य से ‘डिजाइन लिंक्ड इंसेंटिव (DLI) योजना’ के तहत 23 नई चिप-डिजाइन परियोजनाओं को मंजूरी दी है। ये परियोजनाएं देश की प्रमुख कंपनियों, स्टार्टअप्स और MSMEs द्वारा संचालित की जाएंगी। इस पहल के माध्यम से, देश में नई चिप-डिजाइन तकनीक को बढ़ावा मिलेगा, जिससे घरेलू उत्पादों की गुणवत्ता में सुधार और वैश्विक प्रतिस्पर्धा में वृद्धि होगी।

‘DLI योजना’ और सरकार का उद्देश्य

इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्री जितिन प्रसाद ने लोकसभा में जानकारी दी कि DLI योजना, सरकार के 76,000 करोड़ रुपए के ‘सेमिकॉन इंडिया कार्यक्रम’ का हिस्सा है, जिसका उद्देश्य भारत में सेमीकंडक्टर और डिस्प्ले मैन्युफैक्चरिंग के लिए एक पूर्ण इकोसिस्टम तैयार करना है। इस योजना में चिप डिजाइन को विशेष समर्थन दिया जाएगा, जिसके लिए सरकार ने 1,000 करोड़ रुपए का बजट निर्धारित किया है।

योजना के तहत वित्तीय सहायता – कंपनियों को मिलेगी मदद

DLI योजना के तहत कंपनियों को परियोजना की लागत का 50% तक, अधिकतम 15 करोड़ रुपए तक का समर्थन मिलेगा। इसके अलावा, पांच सालों तक नेट सेल्स टर्नओवर का 4-6% तक का व्यावसायिक प्रोत्साहन दिया जाएगा, जो अधिकतम 30 करोड़ रुपए तक हो सकता है। इससे चिप डिजाइन की प्रक्रिया को आसान और आर्थिक रूप से समर्थ बनाया जाएगा।

शुरुआती प्रोटोटाइपिंग के लिए विशेष समर्थन

DLI योजना में कंपनियों को इलेक्ट्रॉनिक डिजाइन ऑटोमेशन (EDA) टूल्स और IP कोर जैसे अत्याधुनिक संसाधनों तक पहुंच प्राप्त होगी। इससे उन्हें प्रोटोटाइप डिजाइन में मदद मिलेगी, और उत्पादन प्रक्रिया को गति मिलेगी। इस प्रक्रिया में, सरकारी प्रोत्साहन के साथ-साथ कंपनियों को उच्च गुणवत्ता वाले चिप डिजाइन तैयार करने का अवसर मिलेगा।

परियोजनाओं का व्यावसायीकरण – निवेशकों को प्रोत्साहन

DLI योजना का एक महत्वपूर्ण पहलू यह है कि इसके तहत व्यावसायिक स्केलिंग के लिए वेंचर कैपिटल फंडिंग की व्यवस्था भी की जाएगी। इस योजना के तहत अब तक 10 स्टार्टअप्स ने सफलतापूर्वक वेंचर कैपिटल फंडिंग प्राप्त की है, जो परियोजनाओं को वैश्विक स्तर पर ले जाने में मदद करेगी।

योजना की शुरुआत और अब तक की सफलता

DLI योजना की शुरुआत दिसंबर 2021 में हुई थी और तब से अब तक 278 शैक्षिक संस्थान और 72 स्टार्टअप्स इसमें भाग ले चुके हैं। इन संस्थानों को EDA टूल्स और अन्य तकनीकी संसाधनों तक पहुंच मिली है। अब तक 17 संस्थानों से 20 चिप डिजाइन सफलतापूर्वक सेमीकंडक्टर प्रयोगशाला (SCL) में बनाए गए हैं। इसके अलावा, 6 कंपनियों ने वैश्विक सेमीकंडक्टर फैब्रिकेशन केंद्रों में अपने प्रोटोटाइप का टेप-आउट पूरा कर लिया है।

सेमीकंडक्टर निर्माण में भारत का वैश्विक प्रतिस्पर्धा में इजाफा

भारत में सेमीकंडक्टर निर्माण क्षेत्र में यह विकास एक बड़ी मील का पत्थर साबित हो सकता है। अब तक भारत अपने अधिकांश सेमीकंडक्टर चिप्स के लिए अन्य देशों पर निर्भर था, लेकिन इस योजना के बाद भारत में सेमीकंडक्टर निर्माण एक सशक्त और आत्मनिर्भर दिशा में बढ़ेगा।

सरकार की पहल – उद्योग विशेषज्ञों और कंपनियों के साथ मिलकर लागू किया जा रहा है

DLI योजना को उद्योग विशेषज्ञों और भागीदार कंपनियों के परामर्श से लागू किया जा रहा है। योजना में समय-समय पर बदलाव और सुधार किए जा रहे हैं ताकि यह और अधिक प्रभावी और व्यावहारिक बने। सरकार का यह प्रयास भारत को सेमीकंडक्टर उत्पादन में वैश्विक नेतृत्व की ओर बढ़ाने में मदद करेगा।

योजना के अंतर्गत कुल मंजूरी और भविष्य की योजनाएं

अब तक इस योजना के तहत कुल ₹803.08 करोड़ की परियोजनाओं को मंजूरी दी जा चुकी है, जिसमें EDA टूल्स की लागत भी शामिल है। सरकार इस क्षेत्र में और अधिक निवेश और नवाचार की उम्मीद कर रही है, ताकि भारत के सेमीकंडक्टर उद्योग में और तेजी से प्रगति हो।

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