बीते सप्ताह अंतरराष्ट्रीय बाजार में गोल्ड की कीमतों में 6.5% का उछाल दर्ज किया गया। इस तेजी के साथ सोने की कीमतें 3,237 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच गईं, जो कोविड-19 के बाद का अब तक का सबसे अच्छा साप्ताहिक प्रदर्शन है। इस बढ़त के पीछे मुख्य वजह अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से घोषित रेसिप्रोकल टैरिफ और वैश्विक वित्तीय अनिश्चितता मानी जा रही है।

डॉलर में कमजोरी ने बढ़ाई सोने की चमक

गोल्ड की कीमतों में तेजी का दूसरा अहम कारण डॉलर की कमजोरी है। अमेरिकी डॉलर यूरो के मुकाबले तीन साल के न्यूनतम स्तर पर आ गया है, जिससे सोना निवेश के लिए एक सुरक्षित विकल्प बनता जा रहा है। इसके साथ ही अमेरिकी शेयर बाजार और बॉन्ड मार्केट में भी गिरावट देखी गई, जिसने गोल्ड की मांग को और बल दिया।

व्यक्तिगत और संस्थागत निवेशकों की मांग में उछाल

सिर्फ व्यक्तिगत निवेशक ही नहीं, बल्कि संस्थागत निवेशक और केंद्रीय बैंक भी सोने में दिलचस्पी दिखा रहे हैं। मंदी की आशंका, बॉन्ड यील्ड में तेजी और वित्तीय बाजारों में उतार-चढ़ाव की वजह से गोल्ड की ओर रुझान बढ़ा है। विश्लेषकों के मुताबिक, गोल्ड आधारित एक्सचेंज ट्रेडेड फंड (ETF) में इस साल की पहली तिमाही में 2020 के बाद से सबसे ज्यादा निवेश देखने को मिला है।

उभरते बाजारों के केंद्रीय बैंकों की रणनीति

उभरते बाजारों के केंद्रीय बैंक डॉलर पर निर्भरता घटाने के लिए अब ज्यादा मात्रा में गोल्ड खरीद रहे हैं। इससे न सिर्फ उनकी विदेशी मुद्रा भंडार में विविधता आती है, बल्कि गोल्ड की कीमतों को भी स्थिरता मिलती है। खासतौर पर चीन में गोल्ड की मांग तेजी से बढ़ी है, जहां लोग अंतरराष्ट्रीय कीमतों से ज्यादा प्रीमियम पर भी खरीदारी कर रहे हैं।

UBS का गोल्ड प्राइस पूर्वानुमान

वैश्विक वित्तीय सेवा कंपनी यूबीएस ने अपने गोल्ड प्राइस पूर्वानुमान को एक बार फिर संशोधित करते हुए 12 महीनों में गोल्ड की कीमत को $3,500 प्रति औंस तक पहुंचने की संभावना जताई है। यह इस वर्ष दूसरी बार है जब UBS ने गोल्ड के लिए अपनी पूर्व भविष्यवाणी को बढ़ाया है। इसका कारण है:

  • वैश्विक स्तर पर बढ़ती अस्थिरता
  • डॉलर की गिरती स्थिति
  • केंद्रीय बैंकों की लगातार खरीद
  • निवेशकों का सोने में भरोसा

भारत में गोल्ड निवेश का असर

भारतीय बाजार में भी गोल्ड की कीमतों में इजाफा देखने को मिला है। विशेषज्ञ मानते हैं कि:

  • आने वाले महीनों में गोल्ड की मांग बनी रहेगी
  • त्योहारी सीजन और शादी-ब्याह की वजह से सोने में और तेजी आ सकती है
  • गोल्ड एक बार फिर बचत और सुरक्षा का मिश्रण बनकर उभर रहा है

निवेशकों के लिए सलाह

विशेषज्ञों की राय है कि:

  • लंबी अवधि के निवेशक अभी भी गोल्ड को अपने पोर्टफोलियो में शामिल रखें
  • उतार-चढ़ाव के समय गोल्ड पोर्टफोलियो को संतुलन देता है
  • मुद्रास्फीति और वैश्विक संकट से बचने के लिए गोल्ड एक प्रभावी माध्यम हो सकता है

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