“ भारत 5 ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था के लक्ष्य की ओर बढ़ रहा है, भारत का ऑटोमोबाइल सेक्टर इस यात्रा का एक प्रमुख स्तंभ बन गया है। यह न केवल आर्थिक वृद्धि में योगदान देता है बल्कि लाखों लोगों को रोजगार भी प्रदान करता है।“
सकल घरेलू उत्पाद में 7.1 प्रतिशत योगदान
भारत का ऑटोमोबाइल उद्योग देश के जीडीपी का 7.1 प्रतिशत और विनिर्माण क्षेत्र के सकल घरेलू उत्पाद का लगभग 49 प्रतिशत योगदान देता है। यह इसे न केवल एक व्यावसायिक क्षेत्र बल्कि देश की आर्थिक बुनियाद का मजबूत आधार बनाता है।
3.7 करोड़ से अधिक रोजगार अवसर
यह सेक्टर 3.7 करोड़ से अधिक नौकरियों का सृजन करता है, जिससे यह सबसे बड़े रोजगार देने वाले क्षेत्रों में से एक बन गया है। उत्पादन, सेवा, डीलरशिप और अनुसंधान जैसे विभिन्न भागों में यह अवसर प्रदान करता है।
8 प्रतिशत निर्यात में योगदान
भारत का ऑटोमोबाइल सेक्टर कुल निर्यात का लगभग 8 प्रतिशत हिस्सा बनाता है। यह देश की वैश्विक प्रतिस्पर्धा क्षमता को दर्शाता है। जापान, मैक्सिको, लैटिन अमेरिका और अफ्रीका जैसे बाजारों में भारतीय वाहनों की मांग तेजी से बढ़ रही है।
भारत का ऑटोमोबाइल उत्पादन: 2024-25 तक की स्थिति
2024-25 तक भारत बिक्री के मामले में दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा ऑटोमोबाइल बाजार बन गया है और उत्पादन में चौथे स्थान पर है।
वाहन उत्पादन के आंकड़े
- कुल उत्पादन: 31 मिलियन से अधिक वाहन
- यात्री कारें: 5 मिलियन+
- वाणिज्यिक वाहन: 1 मिलियन
- तिपहिया वाहन: 1 मिलियन
- दोपहिया वाहन: 24 मिलियन
निर्यात में भारत की बढ़ती उपस्थिति
भारत ने लगभग 5.7 मिलियन वाहनों का निर्यात किया है। यह इस बात का संकेत है कि देश की निर्माण क्षमता और गुणवत्ता अंतरराष्ट्रीय मानकों पर खरी उतर रही है।
नीति समर्थन: सरकार की योजनाएं
उत्पादन आधारित प्रोत्साहन योजना (PLI Scheme)
सरकार की PLI योजना का बजट 25,938 करोड़ रुपए है। इसका उद्देश्य है:
- इलेक्ट्रिक वाहन (EV)
- हाइड्रोजन वाहन
- एडवांस व्हीकल टेक्नोलॉजी
अब तक के निवेश
2025 की शुरुआत तक:
- 67,000 करोड़ रुपए से अधिक के निवेश प्रस्ताव
- 2.3 लाख करोड़ रुपए की अतिरिक्त बिक्री का अनुमान
- 7.5 लाख प्रत्यक्ष रोजगार की संभावना
FAME-II योजना: EV को बढ़ावा देने की दिशा में
FAME-II योजना को 11,500 करोड़ रुपए के बजट के साथ शुरू किया गया है। इस योजना के तहत अब तक:
- 1.3 मिलियन से अधिक इलेक्ट्रिक वाहन को सब्सिडी मिली है।
- दोपहिया, तिपहिया, टैक्सी और बसों को प्राथमिकता दी जा रही है।
बैटरी पर आत्मनिर्भरता: ACC PLI स्कीम
18,100 करोड़ रुपए के परिव्यय के साथ, सरकार ने एडवांस केमिस्ट्री सेल (ACC) PLI योजना शुरू की है।
क्यों जरूरी है यह योजना?
- EV की कुल लागत का 40% हिस्सा बैटरी होती है।
- आयातित बैटरियों पर निर्भरता को कम करने के लिए यह कदम लिया गया है।
- तीन प्रमुख कंपनियां पहले से ही गीगाफैक्ट्रियों पर काम कर रही हैं।
भारत का ऑटोमोबाइल सेक्टर: वैश्विक मंच पर एक नई पहचान
भारत का ऑटोमोबाइल उद्योग अब एक वाणिज्यिक सेक्टर से कहीं अधिक बन चुका है। यह:
- वैश्विक नवाचार में भारत की क्षमता का प्रमाण है
- भारत को “मेक इन इंडिया” अभियान का अग्रणी बनाता है
- आर्थिक, सामाजिक और पर्यावरणीय संतुलन में सहायक है
भारत का ऑटोमोबाइल सेक्टर और भविष्य की संभावनाएं
भारत का लक्ष्य है कि 2030 तक:
- कुल वाहन उत्पादन में 30% हिस्सा इलेक्ट्रिक वाहनों का हो
- भारत EV विनिर्माण और निर्यात में अग्रणी देश बने
- हरित ऊर्जा और स्वच्छ ईंधन के उपयोग को प्राथमिकता दी जाए
