“भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 15 अगस्त को बढ़कर 695.11 अरब डॉलर पर पहुंच गया। पिछले सप्ताह की तुलना में यह 1.49 अरब डॉलर की बढ़ोतरी है। इससे पहले 8 अगस्त को समाप्त सप्ताह में भी विदेशी मुद्रा भंडार में 4.75 अरब डॉलर की वृद्धि हुई थी। लगातार हो रही यह बढ़ोतरी भारत की वित्तीय मजबूती और वैश्विक निवेशकों के भरोसे का संकेत देती है।“
विदेशी मुद्रा भंडार क्यों है जरूरी?
भारत का विदेशी मुद्रा भंडार सिर्फ डॉलर की गिनती नहीं है, बल्कि यह रुपये की स्थिरता और देश की आर्थिक सुरक्षा का मजबूत आधार है। पर्याप्त भंडार होने पर RBI अंतरराष्ट्रीय बाजार में हस्तक्षेप कर रुपये की तेज गिरावट रोक सकता है और विदेशी निवेशकों को भरोसा दिला सकता है।
फॉरेन करेंसी एसेट्स में वृद्धि
15 अगस्त को खत्म हुए सप्ताह में फॉरेन करेंसी एसेट्स (Foreign Currency Assets) 1.92 अरब डॉलर बढ़कर 585.9 अरब डॉलर हो गए।
एसेट्स पर विनिमय दर का असर
डॉलर में व्यक्त ये एसेट्स यूरो, पाउंड और येन जैसी वैश्विक मुद्राओं की विनिमय दर में उतार-चढ़ाव से प्रभावित होते हैं। इसका मतलब है कि केवल डॉलर की खरीद-बिक्री ही नहीं, बल्कि अन्य मुद्राओं के मूल्य भी भंडार के आकार को प्रभावित करते हैं।
विदेशी मुद्रा भंडार में सोने का महत्व
विदेशी मुद्रा भंडार में सोने का हिस्सा 85.67 अरब डॉलर पर स्थिर रहा।
सोना क्यों है अहम?
- सोने को सुरक्षित निवेश माना जाता है।
- वैश्विक भू-राजनीतिक तनाव और आर्थिक अनिश्चितता के दौर में सेंट्रल बैंक इसका भंडारण बढ़ाते हैं।
- आरबीआई ने भी 2021 के बाद से सोने का हिस्सा लगभग दोगुना किया है।
विशेष आहरण अधिकार और अन्य हिस्से
भंडार का एक हिस्सा विशेष आहरण अधिकार (SDRs) के रूप में है, जो 18.78 अरब डॉलर पर स्थिर है। इसके अलावा अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) में रखी गई पोजीशन भी भंडार की मजबूती का हिस्सा है।
RBI का बयान: मजबूत है भारत का बाहरी क्षेत्र
आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने कहा कि भारत का विदेशी मुद्रा भंडार अब इतना मजबूत है कि यह
- 11 महीने से अधिक के आयात को कवर कर सकता है।
- लगभग 96 प्रतिशत बाहरी ऋण का भुगतान सुनिश्चित कर सकता है।
उन्होंने यह भी कहा कि भारत की अर्थव्यवस्था सभी प्रमुख संकेतकों के साथ स्थिरता की ओर बढ़ रही है और विदेशी वित्तीय जरूरतों को पूरा करने में कोई कठिनाई नहीं होगी।
निर्यात में 7.29% की वृद्धि
विदेशी मुद्रा भंडार की मजबूती के साथ-साथ भारत का निर्यात भी तेजी पकड़ रहा है।
जुलाई 2025 के आंकड़े
- जुलाई 2025 में भारत का निर्यात 7.29 प्रतिशत बढ़कर 37.24 अरब डॉलर हो गया।
- पिछले वर्ष जुलाई में यह आंकड़ा 34.71 अरब डॉलर था।
प्रमुख निर्यात क्षेत्र
- इंजीनियरिंग सामान
- इलेक्ट्रॉनिक्स
- दवाइयां और रसायन
- रत्न और आभूषण
वाणिज्य सचिव सुनील बर्थवाल ने बताया कि चालू वित्त वर्ष 2025-26 में भारत की सेवाओं और माल निर्यात दोनों में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, जो वैश्विक निर्यात दर से कहीं अधिक है।
भारत की बाहरी वित्तीय स्थिति क्यों मजबूत हो रही है?
- बढ़ता विदेशी मुद्रा भंडार
- निर्यात में लगातार वृद्धि
- सोने के भंडार में इजाफा
- विदेशी निवेशकों का भरोसा
- रुपये की स्थिरता बनाए रखने में RBI की सक्रिय भूमिका
