“नीति आयोग की सोमवार को जारी तिमाही रिपोर्ट के अनुसार, भारत का व्यापार प्रदर्शन वित्त वर्ष 2025 की तीसरी तिमाही में भू-राजनीतिक अस्थिरता और बदलती वैश्विक मांग के बावजूद सतर्क मजबूती को दर्शाता है। रिपोर्ट में कहा गया कि वाणिज्यिक निर्यात में सालाना आधार पर 3 प्रतिशत की वृद्धि हुई, जो 108.7 अरब डॉलर तक पहुंच गया। विशेष रूप से विमान, अंतरिक्ष यान और पुर्जों के निर्यात में 200 प्रतिशत से अधिक की वृद्धि देखी गई, जिससे यह भारत के शीर्ष दस निर्यातों में शामिल हो गए।“
उच्च तकनीक वाले व्यापारिक निर्यात में वृद्धि
रिपोर्ट के मुताबिक, उच्च तकनीक वाले व्यापारिक निर्यात में 2014 से तेजी आई है, जिसमें विद्युत मशीनरी और हथियार/गोला-बारूद प्रमुख रूप से शामिल हैं। इन क्षेत्रों में निर्यात 10.6 प्रतिशत की सीएजीआर (संयुक्त वार्षिक वृद्धि दर) से मजबूत हुआ है।
नीति आयोग के सदस्य डॉ. अरविंद विरमानी ने कहा, “वित्त वर्ष 2024-25 की तीसरी तिमाही के लिए ट्रेड वॉच क्वार्टरली का नवीनतम एडिशन भारत के व्यापारिक और सेवा व्यापार का ‘टाइम्ली’ और ‘डेटा रिच’ विश्लेषण प्रस्तुत करता है।” उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि रिपोर्ट ने विकसित होती अमेरिकी व्यापार नीतियों और उनके भारत पर प्रभाव का गहन विश्लेषण किया है।
सेवा क्षेत्र की वृद्धि
सेवा क्षेत्र में लगातार मजबूती देखी जा रही है। निर्यात में सालाना आधार पर 17 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, जो अब 102.6 अरब डॉलर तक पहुंच चुका है, जबकि आयात 22.5 प्रतिशत बढ़कर 52.4 अरब डॉलर हो गया। इसके परिणामस्वरूप 52.3 अरब डॉलर का सेवा व्यापार अधिशेष हुआ।
इसके अलावा, भारत डिजिटली डिलिवर्ड सर्विसेज (डीडीएस) का निर्यात में वैश्विक नेता बन चुका है। 2024 में डीडीएस निर्यात 269 अरब डॉलर तक पहुंच गया, जो आईटी सर्विस, पेशेवर कंसल्टिंग और आरएंडडी आउटसोर्सिंग द्वारा समर्थित है। भारत की डिजिटल व्यापार में यह वृद्धि वैश्विक स्तर पर इसके व्यापारिक महत्व को बढ़ाती है।
व्यापार घाटा और आयात में वृद्धि
हालांकि निर्यात में वृद्धि हो रही है, लेकिन आयात भी 6.5 प्रतिशत बढ़कर 187.5 अरब डॉलर तक पहुंच गया, जिससे व्यापारिक घाटा बढ़ा है। नीति आयोग ने यह भी उल्लेख किया कि भारत का औसत टैरिफ जोखिम मध्यम बना हुआ है, और यह नीतिगत बदलाव भारतीय निर्यातकों के लिए एक अनूठा रणनीतिक अवसर प्रस्तुत करता है।
अमेरिकी व्यापार नीति और भारत का रणनीतिक अवसर
अमेरिका की उभरती व्यापार नीति, खासकर अप्रैल 2025 से 10 जुलाई 2025 तक लागू होने वाली टैरिफ व्यवस्था, भारतीय निर्यातकों के लिए एक नया अवसर पेश करती है। अमेरिका ने सभी आयातों पर 10 प्रतिशत बेसलाइन टैरिफ लागू किया है, साथ ही चीन, कनाडा, मेक्सिको, वियतनाम और थाईलैंड जैसे विशिष्ट व्यापारिक साझेदारों पर उच्च टैरिफ भी लगाए हैं।
भारत को इस अवसर का लाभ उठाने के लिए लक्षित निर्यात, ग्लोबल वैल्यू चेन में डीप इंटीग्रेशन और अमेरिका के साथ सेवा-केंद्रित व्यापार समझौतों को बढ़ावा देना चाहिए।
डिजिटल व्यापार का बढ़ता प्रभाव
डिजिटल व्यापार, सीमा-पार डेटा प्रवाह, और पारस्परिक मान्यता समझौतों के इर्द-गिर्द संस्थागत फ्रेमवर्क का निर्माण भारत के सेवा क्षेत्र का विस्तार कर सकता है। यह भारत के वैश्विक सेवा व्यापार केंद्र के रूप में स्थिति को और भी मजबूत करेगा।
नीति आयोग की रिपोर्ट यह स्पष्ट करती है कि भारत का व्यापार प्रदर्शन मजबूत हो रहा है, और इसके व्यापारिक क्षेत्र में भविष्य के लिए बहुत संभावनाएं हैं। अमेरिका की बदलती व्यापार नीतियों और भारतीय निर्यातकों के लिए बने नए अवसरों को देखते हुए, भारत अपने व्यापारिक साझेदारों के साथ रिश्तों को और मजबूत कर सकता है। डिजिटल व्यापार और सेवा केंद्रित नीतियों के माध्यम से भारत के व्यापार क्षेत्र का विकास और भी तेज होगा।
