“भारत में सैटेलाइट दूरसंचार कंपनियों को अनुमति देने के बाद, वर्तमान दूरसंचार कंपनियों और नई तकनीक कंपनियों के बीच तनाव बढ़ गया है। यह पर इंडियन स्पेस एसोसिएशन (ISPA) ने सरकार से एक एकीकृत लाइसेंस नीति की मांग की है, जिसमें सभी संचार सेवा प्रदाताओं के लिए समान लाइसेंस का प्रावधान हो।
दूरसंचार और सैटेलाइट कंपनियों के बीच बढ़ते प्रतिस्पर्धा के कारण इस मुद्दे ने अहम मोड़ लिया है। ISPA का कहना है कि सैटेलाइट आधारित संचार कंपनियों को एक समान लाइसेंस मिलना चाहिए ताकि सभी कंपनियों को समान प्रतिस्पर्धा का मौका मिल सके। इसके साथ ही ISPA ने नेटवर्क, फ्रीक्वेंसी लाइसेंसिंग के लिए एकल-खिड़की प्रणाली की सिफारिश भी की है, ताकि सैटेलाइट संचार सेवा की शुरुआत में समय की बचत हो सके।“
ISPA की ओर से सरकार को पत्र
इंडियन स्पेस एसोसिएशन ने कुछ दिन पहले सरकार को एक विस्तृत पत्र लिखा है, जिसमें नियामक सुधारों की मांग की गई है। इस पत्र में सैटेलाइट आधारित संचार कंपनियों के लिए लाइसेंसिंग ढांचे के बारे में अपनी आपत्तियां व्यक्त की गई हैं। इसके अलावा, सीओएआई (कंज्यूमर ऑपरेटर एसोसिएशन ऑफ इंडिया) ने भी सरकार को एक पत्र लिखा है, जिसमें सैटेलाइट कंपनियों को लाइसेंस देने पर आपत्ति जताई है।
सीओएआई का कहना है कि इससे संचार क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा के समाप्त होने का खतरा उत्पन्न हो सकता है। इस मुद्दे पर दूरसंचार विभाग पहले से ही विचार विमर्श कर रहा है।
एकीकृत लाइसेंस नीति की आवश्यकता
ISPA की सबसे महत्वपूर्ण सिफारिश एकीकृत लाइसेंस नीति के ही खिलाफ नहीं है। उनका यह भी कहना है कि दूरसंचार, प्रसारण, और डिजिटल प्लेटफार्मों को समान लाइसेंसिंग ढांचे का होना चाहिए। यह ढांचा प्रौद्योगिकी-तटस्थ होना चाहिए ताकि सभी कंपनियों को एक समान अधिकार प्राप्त हो सके और वे बिना किसी भेदभाव के काम करने पाएं।
इसके साथ ही, ISPA ने नेटवर्क और फ्रीक्वेंसी लाइसेंसिंग के लिए एकल-खिड़की प्रणाली को लागू करने की सिफारिश की है। इसका कारण सैटेलाइट संचार सेवाओं की शुरुआत में समय की बचत होगा, जिससे इस क्षेत्र में नई कंपनियों का प्रवेश आसानी से हो जाएगा।
वित्तीय स्थिरता और स्पेक्ट्रम नीति पर सिफारिशें
ISPA ने वित्तीय स्थिरता और स्पेक्ट्रम नीति पर भी कई सिफारिशें कीं। उनका मानना है कि स्पेक्ट्रम उपयोग शुल्क (SUC) को घटाया जाना चाहिए और यूएसओएफ (यूनिवर्सल सर्विस ऑब्लिगेशन फंड) से लाइसेंस शुल्क को अलग किया जाना चाहिए। ISPA ने 2021 से पहले के स्पेक्ट्रम होल्डिंग्स के लिए बैंक गारंटी आवश्यकताओं में ढील देने की भी मांग की। इससे कंपनियों को निवेश के मामले में अधिक स्वतंत्रता मिलेगी।
इसके अलावा, स्पेक्ट्रम रोडमैप को पांच साल के लिए रोलिंग किया जाए और 40 साल तक के दीर्घकालिक स्पेक्ट्रम उपयोग अधिकार प्रदान किए जाएं। इस सिफारिश का उद्देश्य निवेश निश्चितता और क्षेत्रीय विकास को बढ़ावा देना है।
सैटेलाइट आधारित संचार सेवा की भूमिका
सैटेलाइट आधारित संचार सेवा भारतीय टेलीकॉम क्षेत्र के भविष्य के लिए महत्वपूर्ण है। इससे दूरदराज़ के क्षेत्रों में संचार सेवाएं पहुंचाना संभव होगा, जहां आम टेलीकॉम नेटवर्क स्थापित नहीं हो सकते। इसके साथ ही, यह नए तकनीकों के लिए मजबूत आधार प्रदान करेगा और प्रौद्योगिकी में परिवर्तन को आसान बनाएगा।
इसलिए, ISPA और अन्य संगठनों का मानना है कि सैटेलाइट कंपनियों को एक समान लाइसेंसिंग व्यवस्था में शामिल किया जाना चाहिए, ताकि यह क्षेत्र समाज के हर हिस्से तक अपनी पहुंच बना सके और भारत के विकास में योगदान दे सके।
सैटेलाइट और दूरसंचार क्षेत्र में नियामक सुधार
ISPA ने नियामक सुधारों की आवश्यकता को व्यक्त करते हुए इस बात की मांग की कि टेलीकॉम एक्ट, आईटी एक्ट, कंपनी अधिनियम, डेटा संरक्षण (DPPDP) एक्ट, पर्यावरण और वित्तीय कानून एकसाथ समन्वित किए जाएं ताकि सभी कंपनियों के लिए एक समान नियम बन सके। इस से नियामक सामंजस्य निर्मित हो सकेगा और कंपनियों को अनुपालन में होने वाली समस्याओं से बचाया जा सकेगा।
क्या यह नीति दूरसंचार क्षेत्र में सुधार ला सकती है?
एकीकृत लाइसेंस नीति से यह आंकिता की जा सकती है कि एक समान नियम संचार सेवाओं के लिए बनेंगे, जिससे प्रतिस्पर्धा कंपनियों के बीच बढ़ेगी और उपभोक्ताओं को सेवाएं बेहतर मिलेंगी। इसके साथ ही, नई सैटेलाइट कंपनियों को बाजार में एंट्री करने का समान मौका मिलेगा, जो भारतीय टेलीकॉम और संचार क्षेत्र में नए परिवर्तन ला सकती हैं।
इसी प्रकार, ISPA और ऐसे अन्य संगठनों द्वारा की गई सिफारिशों से यह क्षेत्र और अधिक व्यवस्थित हो जाएगा और नवाचार प्रक्रिया को गति मिलेगी।
One integrated policy of licensing का मसला भारतीय टेलीकॉम और सैटेलाइट segment के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। यह कदम दूरसंचार कंपनियों के लिए बराबर का मौका प्रदान करेगा और संचार सेवाओं के क्षेत्र में नई तकनीक और इनोवेशन को बढ़ावा देने का काम करेगा। अगर सरकार इन सिफारिशों पर काम करती है, तो नीति भारत के संचार क्षेत्र में न केवल प्रतिस्पर्धा को बढ़ाएगी, बल्कि विकास की दिशा में भी निर्णायक कदम साबित होगी।

