दिल्ली हाईकोर्ट में चल रहे केजरीवाल याचिका विवाद ने अब नया मोड़ ले लिया है। अरविंद केजरीवाल ने जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा की बेंच से केस ट्रांसफर करने की मांग की है। यह याचिका कथित शराब नीति मामले से जुड़ी है, जिसमें ट्रायल कोर्ट के फैसले को चुनौती दी गई है।
सीबीआई ने इस याचिका का विरोध करते हुए अपने हलफनामे में बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव के केस का उदाहरण दिया। एजेंसी का कहना है कि केवल किसी जज के सेमिनार में शामिल होने से पक्षपात साबित नहीं होता। इस आधार पर केजरीवाल याचिका विवाद में लगाए गए आरोप उचित नहीं हैं।
सीबीआई ने आगे कहा कि अदालत की कार्यवाही पूरी तरह से पारदर्शी है और इस केस में कई बार सुनवाई हो चुकी है। एजेंसी के मुताबिक, न्यायिक प्रक्रिया पर सवाल उठाना न्याय व्यवस्था को कमजोर कर सकता है। इस मामले में मनीष सिसोदिया समेत अन्य नेताओं ने भी केस ट्रांसफर की मांग की है। हालांकि, अदालत अब इस पूरे केजरीवाल याचिका विवाद पर विस्तार से सुनवाई करेगी।
Nitin | Suryoday Samachar
FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले सवाल)
Q1. केजरीवाल याचिका विवाद क्या है?
यह मामला उस याचिका से जुड़ा है जिसमें केजरीवाल ने जज बदलने की मांग की है।
Q2. CBI ने लालू यादव केस का उदाहरण क्यों दिया?
CBI ने यह दिखाने के लिए उदाहरण दिया कि न्यायिक प्रक्रिया निष्पक्ष रहती है।
Q3. क्या केस ट्रांसफर होगा?
इस पर फैसला अदालत की अगली सुनवाई में होगा।

