“हर साल भाद्रपद कृष्ण पक्ष अष्टमी को जन्माष्टमी का पर्व बड़ी धूमधाम से मनाया जाता है। इसके 6 दिन बाद कृष्ण षष्ठी या कृष्ण छठी मनाई जाती है।“
👉 कृष्ण षष्ठी 2025 की तिथि:
- जन्माष्टमी 2025: 16 अगस्त 2025, शनिवार
- कृष्ण षष्ठी 2025: 22 अगस्त 2025, शुक्रवार
इस दिन भक्त लड्डू गोपाल जी की पूजा करते हैं और उन्हें नए वस्त्र पहनाते हैं।
कृष्ण षष्ठी का धार्मिक महत्व
भगवान श्रीकृष्ण की छठी पूजा
हिंदू धर्म में बच्चे के जन्म के 6 दिन बाद छठी पूजा का विशेष महत्व होता है। इसी परंपरा के अनुसार जन्माष्टमी के बाद भगवान श्रीकृष्ण की भी छठी पूजा की जाती है।
घर-घर में उत्सव का माहौल
इस दिन घरों में लड्डू गोपाल जी का श्रृंगार, पूजा-पाठ और भजन-कीर्तन का आयोजन किया जाता है।
कृष्ण षष्ठी पर कढ़ी चावल का महत्व
क्यों बनता है कढ़ी चावल?
कृष्ण षष्ठी पर कढ़ी चावल बनाने की परंपरा प्राचीन काल से चली आ रही है। मान्यता है कि इस दिन कढ़ी चावल बनाने से घर में सुख-समृद्धि आती है और नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है।
धार्मिक और आयुर्वेदिक कारण
- कढ़ी दही और बेसन से बनती है, जो पाचन को संतुलित करता है।
- वर्षा ऋतु में कढ़ी चावल का सेवन सेहत के लिए लाभकारी माना गया है।
- परंपरा है कि यह व्यंजन लड्डू गोपाल जी को अर्पित करने के बाद परिवारजन प्रसाद स्वरूप ग्रहण करते हैं।
पूजा विधि और परंपराएँ
कैसे करें कृष्ण षष्ठी पूजा?
- सुबह स्नान करके घर और पूजा स्थल को साफ करें।
- लड्डू गोपाल जी को स्नान कराकर नए वस्त्र पहनाएं।
- पुष्प, धूप, दीप और नैवेद्य से भगवान की पूजा करें।
- प्रसाद में कढ़ी चावल, माखन-मिश्री और फल अर्पित करें।
- शाम को भजन-कीर्तन करें और आरती उतारें।
व्रत और श्रद्धा
कई भक्त इस दिन उपवास या फलाहार करते हैं और संध्या पूजा के बाद ही भोजन ग्रहण करते हैं।
कृष्ण षष्ठी 2025 भक्ति, श्रद्धा और उत्साह से मनाया जाने वाला पर्व है। इस दिन कढ़ी चावल बनाना केवल परंपरा ही नहीं, बल्कि स्वास्थ्य और आध्यात्मिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है। लड्डू गोपाल की छठी पूजा कर भक्त घर-परिवार में सुख-समृद्धि और भगवान श्रीकृष्ण का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।
