"Mahathma Ayyankali Jayanti celebration in Kerala": "PM Modi tribute on Mahathma Ayyankali Jayanti"

सोशल मीडिया प्लेटफ़ॉर्म ‘एक्स’ पर प्रधानमन्त्री नरेंद्र मोदी ने समाज सुधारक को श्रद्धांजलि दी। उन्होंने लिखा कि महात्मा अय्यंकाली को सामाजिक न्याय और सशक्तिकरण के प्रतीक के रूप में हमेशा याद किया जाएगा। वे शिक्षा और ज्ञान के प्रति गहरी निष्ठा रखते थे और उनके प्रयास आज भी पीढ़ियों को प्रेरित करते रहेंगे।

अमित शाह ने बताया समाज के अग्रदूत

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी महात्मा अय्यंकाली को नमन किया और उन्हें एक महान सुधारक बताया। उन्होंने कहा कि अय्यंकाली ने शिक्षा का लोकतंत्रीकरण किया और वंचित वर्गों के लिए समाज में सेतु निर्माण का कार्य किया। उनके विचार और संघर्ष आज भी हर नागरिक को समानता और अधिकारों की लड़ाई के लिए प्रेरित करते हैं।

पिनरई विजयन ने किया उनके संघर्षों का स्मरण

केरल के मुख्यमंत्री पिनरई विजयन ने कहा, अय्यंकाली ने जातिगत भेदभाव और उत्पीड़न के खिलाफ दमदार होकर लड़ाई लड़ी। उन्होंने श्रमिकों के अधिकारों के लिए भी जद्दोजहहत आवाज उठाई। उनके द्वारा सामाजिक न्याय की लड़ाई में अय्यंकाली का संघर्ष आज भी जरूरी है।

भाजपा नेता राजीव चंद्रशेखर का नमन

भाजपा नेता राजीव चंद्रशेखर ने केरल के वेल्लायामबालम में एक कार्यक्रम में पुष्पांजलि अर्पित की। उन्होंने महात्मा अय्यंकाली की सामाजिक न्याय की विचारधारा को आधुनिक भारत के लिए प्रेरणा बताया।

महात्मा अय्यंकाली का जीवन परिचय

महात्मा अय्यंकाली का जन्म 28 अगस्त 1863 को त्रावणकोर (आज का तिरुवनंतपुरम, केरल) में हुआ था। वे दलित समुदाय से थे और बचपन से ही जातिगत भेदभाव का सामना करते थे। लेकिन शिक्षा और समानता की लौ जलाने का उनका सपना उन्हें समाज सुधारक बनने के लिए प्रेरित करता रहा।

शिक्षा के लिए आंदोलन

महात्मा अय्यंकाली ने उस समय दलित बच्चों को स्कूल में पढ़ाने की ठोस मांग उठाई, जब उन्हें शिक्षा से वंचित रखा जाता था। उन्होंने 'सदुजन परिपालन संघम' की स्थापना की और बाल जल्मान के लिए शिक्षा अनिवार्य करने की मांग की। यही कारण है कि उन्हें 'Kerala Dalit Education Reformer' भी कहा जाता है।

श्रमिकों और किसानों की आवाज

अय्यंकाली को केवल शिक्षा तक ही सीमित नहीं रखा। उन्होंने फैक्ट्रियों और खेतों में काम करने वाले श्रमिकों के लिए बेहतर मजदूरी और काम की शर्तों को लेकर आंदोलन चलाया। उनके नेतृत्व में कई हड़तालें हुईं। इसलिए उन्हें श्रमिक आंदोलन के जनक के रूप में भी सम्मान दिया जाता है।

जातिगत भेदभाव के विरुद्ध संघर्ष

महात्मा अय्यंकाली का सबसे महत्वपूर्ण योगदान जातिगत भेदभाव के खिलाफ उनकी जंग है। उन्होंने पारंपरिक सड़कों और मंदिरों में प्रवेश के अधिकार के लिए आंदोलन किए। उनकी कोशिशों के कारण ही दलितों को समाज में बराबरी का दर्जा प्राप्त करने की राह आसान हुई।

अय्यंकाली की विरासत

आज भी Mahathma Ayyankali Jayanti पर पूरे देश में उन्हें सम्मानित किया जाता है। उनका जीवन संदेश देता है कि सामाजिक न्याय, शिक्षा और समानता ही एक न्यायपूर्ण समाज की नींव है। उनके संघर्ष ने भारतीय समाज को नई viewBox डाली और आने वाली पीढ़ियों को बदलाव का साहस दिया।

आधुनिक भारत में प्रासंगिकता

आज जबकि हम सामाजिक न्याय के बारे में बात करते हैं तो महात्मा अय्यंकाली की नीति और भी ज्यादा महत्वपूर्ण हो जाती है। उनका विश्वास था कि शिक्षा हर नागरिक का अधिकार है और किसी भी समाज को तरक्की बिना समानता के नहीं हो सकती। यही कारण है कि उनका नाम आज भी प्रेरणा का स्तंभ बना हुआ है।

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