“प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गुरुवार को पांच दिवसीय एशिया दौरे पर रवाना हो गए। जापान उनका पहला पड़ाव होगा और उसके बाद वे चीन जाएंगे। दौरे का सब्सिडियरी एजेंडा दोनों देशों के साथ द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करना और नई सहयोग को मजबूत करना है। अमेरिकी टैरिफ विवाद के मध्य यह यात्रा विशेष मायने रखती है। भारत-अमेरिकी व्यापारिक तनाव ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भूचाल पैदा कर दिया है। ऐसे में मोदी का यह दौरा भारत की कूटनीतिक रणनीति को एक नई दिशा दे सकता है।”
अमेरिकी टैरिफ विवाद की परिस्थिति हाल ही में अमेरिका ने भारतीय उत्पादों पर 50 फीसदी तक टैरिफ लगाने का फैसला किया है। इस स्थिति से भारतीय निर्यातकों को बढ़ती चिंताएं हो गई हैं। महंगा होने वाला निर्यात अमेरिकी बाजार में भारतीय सामान की प्रतिस्पर्धा को कम कर सकता है। केंद्र सरकार का कहना है कि अमेरिकी टैरिफ का प्रभाव बस अल्पकालिक होगा और समग्र व्यापार के साथ जीडीपी पर इसका दीर्घकालिक प्रभाव सीमित रहेगा। इसी की पृष्ठभूमि में पीएम मोदी के जापान और चीन दौरे का भी महत्त्व और अधिक माना जा रहा है।
जापान में द्विपक्षीय संबंधों पर जोर जापान भारत का एक रणनीतिक सहयोगी है। दोनों देशों के बीच तकनीकी सहयोग, रक्षा सहयोग और निवेश के क्षेत्र में गहरे संबंध हैं। पीएम मोदी जापान में उच्चस्तरीय बैठकों में हिस्सा लेंगे। इस क्रम में बुनियादी ढांचे, हाई-स्पीड रेल परियोजनाओं और स्वच्छ ऊर्जा पर चर्चा होने की संभावना है। भारत-जापान सहयोग एशिया में शक्ति संतुलन और आर्थिक विकास दोनों के लिहाज से महत्वपूर्ण है।
पीएम मोदी चीन जाएंगे जापान यात्रा के बाद चीन में शिखर सम्मेलन और वैश्विक मुद्दे पीएम मोदी चीन जाएंगे। वह यहां शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे। रूस, चीन, पाकिस्तान और मध्य एशिया के कई देशों के प्रमुख इस शिखर बैठक में शामिल होंगे। मोदी की यात्रा में कई देशों के प्रमुखों से मुलाकात तय है। इसमें आर्थिक सहयोग, सुरक्षा मुद्दे और क्षेत्रीय स्थिरता जैसे विषयों पर बात होगी। अमेरिकी टैरिफ विवाद के बीच भारत अपनी स्थिति मजबूत करने और नए अवसर तलाशने पर फोकस करेगा।
अमेरिकी टैरिफ विवाद और कूटनीतिक रणनीति अमेरिकी टैरिफ विवाद के चलते भारत पर दबाव बढ़ा है। लेकिन सरकार का मानना है कि भारत के पास वैकल्पिक बाजार तलाशने के पर्याप्त अवसर मौजूद हैं। जापान और चीन की यात्राएं भारत के लिए नए आर्थिक साझेदारी मार्ग खोल सकती हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि एशियाई देशों के साथ सहयोग बढ़ाकर भारत अमेरिकी दबाव को संतुलित कर सकता है।
वैश्विक संदर्भ में भारत की भूमिका आज की वैश्विक राजनीति में लगातार बढ़ती जा रही है। अमेरिका, जापान और चीन तीनों भारत के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण देश हैं। इसलिए, अमेरिकी टैरिफ विवाद के बीच पीएम मोदी का यह दौरा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की स्थिति को मजबूत करने का काम करेगा। भारत अब एक उभरती अर्थव्यवस्था ही नहीं, बल्कि वैश्विक मंच पर प्रभावशाली खिलाड़ी भी है। पीएम मोदी की इस यात्रा से यह संदेश जाएगा कि भारत वैश्विक मुद्दों पर सक्रिय और निर्णायक भूमिका निभाने के लिए तैयार है।

