“गुरुवार को चीन के किंगदाओ शहर में आयोजित शंघाई सहयोग संगठन (एससीओ) रक्षा मंत्रियों की बैठक में भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने आतंकवाद के मुद्दे पर भारत का स्पष्ट और सख्त रुख प्रस्तुत किया। उन्होंने संयुक्त बयान पर हस्ताक्षर करने से इनकार कर दिया, यह कहते हुए कि वह दस्तावेज़ भारत की आतंकवाद विरोधी नीति को सही ढंग से प्रतिबिंबित नहीं करता।“
राजनाथ सिंह ने क्यों किया संयुक्त बयान का विरोध?
भारत का विरोध इस बात को लेकर था कि:
- बयान में जम्मू-कश्मीर के पहलगाम आतंकी हमले का कोई उल्लेख नहीं था
- बलूचिस्तान का संदर्भ डालकर अप्रत्यक्ष रूप से भारत पर अशांति फैलाने का झूठा आरोप लगाया गया
- ऐसा प्रतीत होता है कि यह बयान पाकिस्तान और चीन के दबाव में तैयार किया गया है
राजनाथ सिंह ने स्पष्ट कहा कि भारत पाखंडी और एकतरफा रुख वाले दस्तावेज़ का समर्थन नहीं कर सकता, खासकर जब वह आतंकवाद के खिलाफ भारत की नीति को कमजोर करता हो।
पहलगाम हमले पर भारत का रुख
रक्षा मंत्री ने अपने संबोधन में अप्रैल में पहलगाम में हुए आतंकी हमले का जिक्र किया, जिसमें धार्मिक पहचान के आधार पर निर्दोष लोगों की हत्या की गई थी। उन्होंने बताया:
“इस हमले की जिम्मेदारी लश्कर-ए-तैयबा की शाखा द रेजिस्टेंस फ्रंट ने ली है। इस घटना की शैली एलईटी के पुराने हमलों से मेल खाती है।”
उन्होंने कहा कि इस हमले के जवाब में भारत ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ शुरू किया, जिससे स्पष्ट हो गया कि भारत अब आतंकवाद के केंद्रों को सुरक्षित पनाहगाह नहीं मानता।
भारत की आतंकवाद नीति: जीरो टॉलरेंस
राजनाथ सिंह ने जोर देकर कहा कि भारत आतंकवाद के खिलाफ “Zero Tolerance” नीति पर चलता है। उन्होंने कहा:
“भारत अब आतंकवादियों और उनके समर्थकों को उनकी सरहदों में जाकर जवाब देता है। भारत को अपने आत्मरक्षा का अधिकार है और हम इसका पूरी तरह से प्रयोग करेंगे।”
सदस्य देशों से एकजुटता की अपील
रक्षा मंत्री ने एससीओ के सभी सदस्य देशों से अपील की कि वे:
- आतंकवाद और कट्टरवाद के खिलाफ एकजुट हों
- आपसी विश्वास, सुरक्षा और शांति को प्राथमिकता दें
- आतंकवाद को राज्य प्रायोजित समर्थन से बचाएं
चीन की भूमिका पर भी अप्रत्यक्ष हमला
भारत का यह रुख इसलिए और महत्वपूर्ण है क्योंकि इस समय एससीओ की अध्यक्षता चीन के पास है। संयुक्त बयान में पहलगाम हमले की अनदेखी और बलूचिस्तान का उल्लेख करना यह दर्शाता है कि चीन ने पाकिस्तान का पक्ष लेने की कोशिश की है।
राजनाथ सिंह का संयुक्त बयान पर हस्ताक्षर न करना, एक रणनीतिक संकेत है कि भारत राष्ट्रीय सुरक्षा और आतंकवाद जैसे मुद्दों पर किसी अंतरराष्ट्रीय दबाव के आगे झुकेगा नहीं।
एससीओ बैठक में राजनाथ सिंह की ओर से दिया गया संदेश स्पष्ट है:
भारत न्याय, सच्चाई और आतंकवाद विरोधी नीति पर अडिग है। चाहे वह अंतरराष्ट्रीय मंच हो या पड़ोसी देशों का दबाव, भारत अब आतंकवादियों और उनके समर्थकों को बख्शने वाला नहीं है।

