“चीन के चिंगदाओ शहर में आयोजित शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के सदस्य देशों के रक्षा मंत्रियों की बैठक में भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने आतंकवाद, कट्टरपंथ और सुरक्षा चुनौतियों पर भारत का स्पष्ट और सख्त रुख दोहराया। बैठक के दौरान उन्होंने रूस और बेलारूस के अपने समकक्षों से अलग-अलग मुलाकातें भी कीं और रक्षा सहयोग को मजबूत करने पर चर्चा की।“
रूस के साथ रक्षा सहयोग पर विस्तार से चर्चा
राजनाथ सिंह ने रूस के रक्षा मंत्री आंद्रेई बेलौसोव से मुलाकात की और भारत-रूस के दीर्घकालिक रक्षा सहयोग को और मजबूत बनाने पर चर्चा की। उन्होंने कहा:
“भारत और रूस के रक्षा संबंध सिर्फ एक खरीदार-विक्रेता मॉडल से आगे बढ़कर अब संयुक्त अनुसंधान, सह-विकास और उत्पादन के स्तर पर पहुंच गए हैं।”
प्रमुख सहयोग परियोजनाएं:
- एस-400 वायु रक्षा प्रणाली
- टी-90 टैंकों और एसयू-30 एमकेआई का लाइसेंस प्राप्त निर्माण
- कामोव हेलीकॉप्टर, INS विक्रमादित्य, ब्रह्मोस मिसाइल
- भारत में एके-203 राइफलों का निर्माण
बेलारूस के साथ रक्षा संवाद
राजनाथ सिंह ने बेलारूस के रक्षा मंत्री विक्टर ख्रेनिन के साथ भी द्विपक्षीय वार्ता की। उन्होंने इसे “अच्छी बातचीत” बताते हुए साझा किया कि रक्षा और क्षेत्रीय सुरक्षा पर विचारों का आदान-प्रदान हुआ।
भारत का संदेश: आतंकवाद पर दोहरे मापदंड स्वीकार नहीं
राजनाथ सिंह ने एससीओ मंच पर अपने संबोधन में:
- जम्मू-कश्मीर के पहलगाम आतंकी हमले का जिक्र किया
- ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की जानकारी दी, जो भारत की आत्मरक्षा नीति का हिस्सा था
- पाकिस्तान समर्थित आतंकवाद को अंतरराष्ट्रीय मंच पर बेनकाब किया
उन्होंने स्पष्ट कहा:
“आतंकवाद के केंद्र अब सुरक्षित नहीं हैं। भारत आतंकवाद के खिलाफ शून्य सहनशीलता की नीति पर अडिग है।”
संयुक्त बयान पर भारत ने क्यों नहीं किए हस्ताक्षर?
एससीओ द्वारा जारी संयुक्त बयान में:
- पहलगाम आतंकी हमले का कोई जिक्र नहीं था
- इसके विपरीत, बलूचिस्तान का जिक्र था और अप्रत्यक्ष रूप से भारत पर अशांति फैलाने का आरोप लगाया गया
भारत ने इस पक्षपातपूर्ण बयान को खारिज करते हुए हस्ताक्षर नहीं किए, जो भारत की सैद्धांतिक स्पष्टता और आतंकवाद के खिलाफ सख्त नीति को दर्शाता है।
पूर्वी लद्दाख गतिरोध के बाद किसी भारतीय मंत्री की पहली चीन यात्रा
यह यात्रा इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि:
- मई 2020 में पूर्वी लद्दाख में भारत-चीन के बीच सैन्य गतिरोध के बाद किसी भी भारतीय केंद्रीय मंत्री की यह पहली आधिकारिक चीन यात्रा है
- इस यात्रा के माध्यम से भारत ने स्पष्ट किया कि वह रणनीतिक मुद्दों पर कोई समझौता नहीं करेगा, चाहे वह चीन ही क्यों न हो
भारत का रुख: क्षेत्रीय शांति के लिए वैश्विक एकजुटता जरूरी
राजनाथ सिंह ने कहा कि:
“आतंकवाद, कट्टरपंथ और उग्रवाद क्षेत्रीय शांति और विश्वास के लिए सबसे बड़े खतरे हैं। हमें वैश्विक स्तर पर एकजुट होकर इनका मुकाबला करना होगा।”
उन्होंने एससीओ देशों से आतंक के खिलाफ एकजुट रुख अपनाने और प्रायोजक राष्ट्रों को जवाबदेह ठहराने का आग्रह किया।
एससीओ रक्षा मंत्रियों की बैठक में भारत ने:
- अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा प्राथमिकताओं को स्पष्ट किया
- रूस और बेलारूस के साथ द्विपक्षीय रक्षा संबंधों को मजबूती दी
- आतंकवाद के प्रति दोहरे रवैये को सिरे से खारिज किया
- और स्पष्ट कर दिया कि भारत रणनीतिक स्वायत्तता और सुरक्षा हितों से कोई समझौता नहीं करेगा

