प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोमवार को एक लेख साझा करते हुए बताया कि किस प्रकार नीतिगत प्रोत्साहनों और नवाचारों के माध्यम से भारत का स्टील सेक्टर दुनिया में अग्रणी बनने की दिशा में बढ़ रहा है। पीएमओ ने केंद्रीय इस्पात एवं भारी उद्योग मंत्री एचडी कुमारस्वामी की पोस्ट को साझा करते हुए इस प्रयास को सरकार की प्रतिबद्धता करार दिया।

स्टील केवल धातु नहीं, आत्मनिर्भर भारत की आधारशिला है

एचडी कुमारस्वामी ने कहा:

“स्टील केवल मेटल नहीं है। यह उभरते और मजबूत भारत का आधार है।”

उन्होंने कहा कि भारतीय स्टील आज देश की बुनियादी ढांचा क्रांति के केंद्र में है — हाईवे, हाई-स्पीड रेल, मेट्रो, क्लीन एनर्जी, रक्षा और इलेक्ट्रिक मोबिलिटी जैसे क्षेत्रों में इसकी भूमिका निर्णायक है।

मोदी सरकार के तहत दोगुना हुआ स्टील उत्पादन

  • 2014 में उत्पादन: लगभग 81 मिलियन टन
  • 2024 तक उत्पादन: 152 मिलियन टन से अधिक
  • 2030 लक्ष्य: 300 मिलियन टन

यह बढ़त न केवल भारत की आर्थिक वृद्धि को दर्शाती है, बल्कि वैश्विक स्टील आपूर्ति श्रृंखला में भारत की बढ़ती भूमिका को भी रेखांकित करती है।

आत्मनिर्भरता की ओर भारत का स्टील सेक्टर

भारत ने न केवल घरेलू उत्पादन में आत्मनिर्भरता हासिल की है, बल्कि अब यह गुणवत्तापूर्ण स्टील का निर्यात भी कर रहा है। देश में तैयार स्टील अब MSME से लेकर बड़े उद्योगों तक को सशक्त बना रहा है।

नीति और नवाचार ने दी नई दिशा

एचडी कुमारस्वामी ने बताया कि भारत सरकार की नीतियां जैसे:

  • डोमेस्टिक आयरन एंड स्टील प्रोडक्ट्स पॉलिसी
  • PLI स्कीम (Production Linked Incentives)
  • ग्रीन स्टील इनोवेशन

… इन सभी ने स्टील क्षेत्र को आत्मनिर्भर और प्रतिस्पर्धी बनाने में मदद की है।

क्यों भारत बन रहा है ग्लोबल स्टील लीडर?

  1. तेज़ी से बढ़ती घरेलू मांग
  2. स्टील निर्माण में टेक्नोलॉजी का समावेश
  3. ईवी और इंफ्रास्ट्रक्चर में निरंतर निवेश
  4. क्लाइमेट-फ्रेंडली स्टील इनोवेशन
  5. विकासशील देशों को स्टील निर्यात में लीडिंग रोल

पीएम मोदी की सोच और विश्व स्तर पर पहचान

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में “मेक इन इंडिया” और “आत्मनिर्भर भारत” जैसी पहलों ने स्टील सेक्टर को न केवल आर्थिक शक्ति बनाया, बल्कि राजनीतिक और कूटनीतिक ताकत भी प्रदान की है।

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