“देशभर में मानसूनी बारिश का कहर गुरुवार को भी जारी रहा। जम्मू-कश्मीर, पंजाब, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, असम, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, मध्य प्रदेश, तेलंगाना और कर्नाटक जैसे राज्यों में हालात बिगड़ते जा रहे हैं। लगातार हो रही बारिश ने नदियों का जलस्तर बढ़ा दिया है और कई क्षेत्रों में बाढ़ जैसी स्थिति बन गई है। पंजाब के आठ जिले ने पिछले चार दिनों से बाढ़ की चपेट में आ गए हैं। गांवों और कस्बों में पानी भरने से नागरिकों को घर छोड़ना पड़ा है। फसलें खड़ी खेतों में खराब हो गई हैं, जिससे किसानों की मजबूरियां और बढ़ गईं।”
छत्तीसगढ़ और महाराष्ट्र में जान-माल का नुकसान छत्तीसगढ़ के बस्तर संभाग में भारी बारिश ने जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है। अब तक यहां आठ लोगों की मौत हो चुकी है। सड़कें टूट गई हैं और पुल बह गए हैं, जिससे राहत दलों को भी दिक्कतें झेलनी पड़ रही हैं। महाराष्ट्र के मराठवाड़ा हिस्से में लगातार बारिश की वजह से 2,000 से भी अधिक लोगों को सुरक्षित उपचार भेजा गया है। प्रशासन ने बचाव और राहत कार्य तेज कर दिया है। यहां कई नदियां खतरे के स्तर से ऊपर बह रही हैं।
असम और पूर्वोत्तर में बाढ़ की मार असम की राजधानी गुवाहाटी के कई रहने-जीने वाले इलाके बारिश के पानी में डूब गए हैं। लोग घरों में फंसे हुए हैं और प्रशासन नावों के जरिए उन्हें बाहर निकालने में जुटा है। मानसूनी बारिश ने यहां जनजीवन को पूरी तरह से प्रभावित किया है। पूर्वोत्तर के अन्य राज्यों में भी भारी बारिश ने हालात बिगाड़ दिए हैं। कई गांवों का संपर्क टूटा हुआ है और राहत दल लगातार सक्रिय हैं।
तेलंगाना में सेना की सहायता से राहत अभियान तेलंगाना के राजन्ना सिरसिला जिले में भारी वर्षा के दौरान सेना की सहायता ली गई। अपर मनैर परियोजना के करीब फंसे कई लोगों को बचाने के लिए हेलिकॉप्टरों का उपयोग किया गया। हकीमपेट के अलावा सैन्य हेलिकॉप्टरों को भी राहत कार्य में तैनात किया गया। इनसे दर्जनों लोगों को सुरक्षित जगहों पर पहुंचाया गया। प्रशासन ने राहत शिविर स्थापित किए हैं जहां प्रभावित लोगों को भोजन और छाया प्रदान की जा रही है।
उत्तर भारत में लगातार बारिश से बढ़ा खतरा हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में भारी बारिश के कारण भूस्खलन का खतरा बढ़ गया है। पहाड़ी इलाकों में सड़कें बंद हो गई हैं और यातायात प्रभावित है। जम्मू-कश्मीर के कई क्षेत्रों में भी लगातार बारिश से हालात बिगड़ते जा रहे हैं। नदियों और नालों में उफान के कारण ग्रामीण इलाके सबसे ज्यादा प्रभावित हो रहे हैं।
कृषि और अर्थव्यवस्था पर प्रभाव मानसूनी वर्षा का प्रभाव सीधे-सीधे कृषि पर दिखाई दे रहा है। मध्य प्रदेश, पंजाब और छत्तीसगढ़ आदि राज्यों में धान और अन्य खरीफ फसलें पानी में डूब गई हैं। किसानों को भारी नुकसान झेलना पड़ रहा है। लंबे समय तक अगर यह अवस्था बनी रही तो खाद्य आपूर्ति और बाजार पर भी असर पड़ सकता है। विशेषज्ञ मानते हैं कि मानसूनी वर्षा जहां जल आपूर्ति के लिए जरूरी है, वहीं इसकी अधिकता आर्थिक संकट भी पैदा कर सकती है।
प्रशासन की गड़बड़ियां और तैयारी प्रभावित राज्यों की सरकारें और केंद्र सरकार लगातार हालात पर नज़र बनाए हुए हैं। एनडीआरएफ की टीमें कई राज्यों में तैनात की गई हैं। राहत शिविरों की संख्या बढ़ाई जा रही है। इसके साथ ही स्वास्थ्य विभाग ने भी अलर्ट जारी किया है ताकि बाढ़ के बाद फैलने वाली बीमारियों को रोका जा सके।

