उत्तराखंड के चमोली जिले में मंगलवार सुबह एक बार फिर प्रकृति का कहर देखने को मिला जब नंदप्रयाग घाट मुख गांव के पास बादल फटने (Cloudburst) की घटना सामने आई। हालांकि राहत की बात यह रही कि अब तक की रिपोर्ट में किसी भी प्रकार के जान-माल के नुकसान की पुष्टि नहीं हुई है।

राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (SDRF) ने स्थिति का आकलन करने के लिए तत्काल एक टीम को मौके पर रवाना किया है और स्थानीय प्रशासन को भी सतर्क कर दिया गया है।

SDRF की तत्परता से स्थिति नियंत्रण में

एसडीआरएफ के मुताबिक, घटना की सूचना मिलते ही बचाव टीम को रवाना किया गया।
टीम स्थानीय ग्रामीणों, पंचायत प्रतिनिधियों और पुलिस के साथ मिलकर क्षेत्र का भौतिक निरीक्षण कर रही है ताकि स्थिति का पूरा आकलन किया जा सके।

फिलहाल कोई व्यक्ति लापता नहीं है, और क्षेत्रीय लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है।

IMD की भविष्यवाणी और अलर्ट

इस घटना से एक दिन पहले ही भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने 6 जुलाई को भारी बारिश की चेतावनी जारी की थी।
चार दिन के इस अलर्ट में उत्तरकाशी, टिहरी, बागेश्वर, देहरादून और रुद्रप्रयाग जिलों को हाई रिस्क जोन में रखा गया था।

वहीं, राज्य आपातकालीन संचालन केंद्र (SEOC) ने भी 6 जुलाई को भूस्खलन और भारी बारिश की संभावना वाले क्षेत्रों के लिए चेतावनी जारी की थी, जिसमें विशेष रूप से चमोली, रुद्रप्रयाग, उखीमठ, घनसाली, डुंडा और नरेंद्र नगर के क्षेत्र शामिल थे।

यमुनोत्री मार्ग पर पुल बहा, संपर्क टूटा

इससे पहले सोमवार को, उत्तरकाशी जिले में यमुनोत्री मार्ग पर ओजरी के पास एक पुल भारी बारिश के कारण बह गया
राष्ट्रीय राजमार्ग बाधित हो गया है जिससे तीर्थयात्रियों और स्थानीय लोगों को काफी परेशानी हो रही है।

अधिकारियों के अनुसार बारिश का सिलसिला लगातार जारी है और इससे सड़कें धंसी हैं, नदी-नाले उफान पर हैं और कुछ गांवों का संपर्क भी टूट गया है।

अलकनंदा नदी का जलस्तर बढ़ा, खतरे से फिलहाल नीचे

चमोली और रुद्रप्रयाग जिलों में भारी बारिश से अलकनंदा नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ा है।
हालांकि फिलहाल नदी का प्रवाह खतरे के निशान से नीचे है, लेकिन विभाग की टीमें सतर्क हैं और लगातार जलस्तर पर नजर बनाए हुए हैं।

मुख्यमंत्री ने किया हवाई सर्वेक्षण

राज्य के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बीते रविवार को उत्तरकाशी जिले के सिलाई बैंड और ओजरी बैंड जैसे आपदा प्रभावित इलाकों का हवाई सर्वेक्षण किया।

मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि:

  • आपदा प्रबंधन में कोई कोताही न बरती जाए
  • आवश्यक राहत सामग्री और मेडिकल सुविधाएं तुरंत उपलब्ध कराई जाएं
  • प्रभावित क्षेत्रों में जल्द ही सड़क संपर्क बहाल किया जाए
  • लोगों को समय पर सतर्क किया जाए

प्रशासन की अपील: सतर्क रहें, दिशा-निर्देशों का पालन करें

प्रशासन ने स्थानीय नागरिकों और पर्यटकों से मौसम विभाग के निर्देशों का पालन करने की अपील की है।
विशेषकर पर्वतीय क्षेत्रों और नदी किनारे जाने से बचने को कहा गया है। स्कूलों और धार्मिक स्थलों के आसपास भी विशेष सतर्कता बरती जा रही है।

राज्य सरकार और SDRF ने सभी जिला प्रशासन को निर्देशित किया है कि वे:

  • सभी आपातकालीन केंद्र सक्रिय रखें
  • संभावित खतरे वाले इलाकों में सर्च एंड रेस्क्यू टीमों की तैनाती करें
  • रिलिफ कैम्प्स, भोजन और दवाइयों की व्यवस्था पहले से सुनिश्चित करें
  • स्थानीय रेडियो और सोशल मीडिया के ज़रिए लोगों तक समय पर जानकारी पहुंचाएं

उत्तराखंड जैसे संवेदनशील राज्य में मानसून के समय बादल फटना, भूस्खलन और भारी बारिश आम घटनाएं हो चुकी हैं, लेकिन सरकारी एजेंसियों की तत्परता और लोगों की जागरूकता से इन घटनाओं का प्रभाव कम किया जा सकता है।

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