भारत में हर 1000 प्रसव में औसतन 6 बच्चों का मृत जन्म हो रहा है, जो एक गंभीर स्वास्थ्य समस्या है। यह दर शहरी इलाकों की तुलना में ग्रामीण इलाकों में भी ज्यादा देखी जा रही है। इस समस्या की मुख्य वजह गर्भवती महिलाओं में आयरन की कमी, सही समय पर चेकअप की कमी, और अन्य स्वास्थ्य समस्याएं हैं, जिनका असर शिशु की मृत्यु दर पर पड़ रहा है।

मृत जन्म दर की बढ़ती चिंता

हाल ही में किए गए एक सर्वेक्षण के अनुसार, भारत में प्रति 1000 प्रसवों में औसतन 6.548 मृत बच्चों का जन्म होता है। इस सर्वे के अनुसार, शहरी इलाकों में यह दर ग्रामीण इलाकों से अधिक पाई गई है। इस तथ्य को नागरिक पंजीकरण प्रणाली और राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण के आंकड़ों से पुष्टि की गई है।

आयरन की कमी और एनीमिया – मृत जन्म का प्रमुख कारण

मृत जन्म की दर उन इलाकों में अधिक पाई गई जहां गर्भवती महिलाएं एनीमिक थीं। एनीमिया यानी आयरन की कमी, गर्भवती महिलाओं के लिए एक बड़ा खतरा बन चुकी है। शोध के मुताबिक, जिन महिलाओं में आयरन की कमी होती है, उनके लिए शिशु की मृत्यु का खतरा अधिक होता है।

विशेषज्ञों का कहना है कि गर्भवती महिलाओं को आयरन और फोलिक एसिड की गोलियों का नियमित सेवन करना चाहिए, ताकि शिशु की सही विकास में मदद मिल सके।

शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में मृत जन्म दर का अंतर

भारत में मृत जन्म की दर शहरी इलाकों की तुलना में ग्रामीण क्षेत्रों में ज्यादा पाई गई। इस अंतर को दूर करने के लिए सही पोषण, आयरन और फोलिक एसिड का सेवन, और नियमित मेडिकल चेकअप जरूरी हैं।

समय से पहले जन्म और जटिलताएं

समय से पहले जन्म और प्रसव के दौरान आक्सीजन की कमी जैसी जटिलताएं भी मृत जन्म का कारण बन सकती हैं। इसके अलावा, नवजात शिशुओं में संक्रमण भी एक प्रमुख कारण है। स्वच्छ मासिक धर्म प्रथाएं और सी-सेक्शन प्रसव की प्रक्रियाएं मृत जन्म की दर को कम करने में मदद कर सकती हैं।

दक्षिण भारत में सी-सेक्शन प्रसव की अधिकता

एनएफएचएस-5 के आंकड़ों के मुताबिक, दक्षिण भारत में सी-सेक्शन प्रसव की दर लगभग 45 प्रतिशत थी। यह प्रक्रिया शिशु के जन्म के दौरान जटिलताओं को कम करने में मदद करती है और मृत जन्म की संभावना को घटाती है।

प्रेग्नेंसी के दौरान चेकअप और पोषण की अहमियत

असम, उत्तर प्रदेश, छत्तीसगढ़ और अन्य राज्यों से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार, गर्भवती महिलाओं को प्रेग्नेंसी के दौरान कम से कम चार चेकअप और सही पोषण प्राप्त करना चाहिए। इन उपायों से मृत जन्म के जोखिम को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

कम वजन और आयरन की कमी का प्रभाव

जहां गर्भवती महिलाएं कम वजन और आयरन की कमी से जूझ रही थीं, वहां मृत जन्म दर अधिक थी। इस बात का संकेत है कि प्रेग्नेंसी के दौरान सही आहार और स्वास्थ्य देखभाल की आवश्यकता है।

लिंग आधारित मृत जन्म दर में असमानता

सर्वेक्षण के दौरान यह पाया गया कि लिंग आधारित मृत जन्म दर में कोई बड़ी असमानता नहीं थी, हालांकि पुरुष भ्रूणों में मृत जन्म की दर थोड़ी अधिक पाई गई। इसका कारण जैविक संवेदनशीलता हो सकता है।

मृत जन्म दर को कम करने के प्रयास

भारत सरकार और अन्य संस्थाएं इस समस्या को गंभीरता से लेकर मृत जन्म की दर को कम करने के प्रयास कर रही हैं। गर्भवती महिलाओं के लिए जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं, ताकि वे अपनी प्रेग्नेंसी के दौरान उचित आहार और स्वास्थ्य देखभाल प्राप्त कर सकें।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *