भारतीय मुद्रा में लगातार कमजोरी देखने को मिल रही है। शुक्रवार को रुपया रिकॉर्ड गिरावट के साथ डॉलर के मुकाबले 95.97 के स्तर पर बंद हुआ। बढ़ती कच्चे तेल की कीमतें, मजबूत अमेरिकी डॉलर और वैश्विक तनाव ने रुपये पर दबाव बढ़ा दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यही हालात बने रहे, तो आने वाले समय में रुपया और कमजोर हो सकता है। विदेशी बाजार में डॉलर की मांग लगातार बढ़ रही है। अमेरिका के मजबूत आर्थिक आंकड़ों के बाद निवेशक सुरक्षित निवेश के तौर पर डॉलर को प्राथमिकता दे रहे हैं।
इसका असर सीधे भारतीय मुद्रा पर दिखाई दे रहा है। भारत अपनी जरूरत का करीब 85 प्रतिशत कच्चा तेल आयात करता है। ऐसे में तेल की कीमत बढ़ने से डॉलर की मांग बढ़ती है और रुपया कमजोर होता है। मार्केट एक्सपर्ट्स का कहना है कि मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और वैश्विक आर्थिक अनिश्चितता के कारण निवेशक सतर्क हैं। इससे एशियाई मुद्राओं में दबाव बना हुआ है। आने वाले महीनों में RBI की नीतियां और अंतरराष्ट्रीय बाजार की स्थिति रुपये की दिशा तय करेंगी।
FAQ
सवाल: रुपया रिकॉर्ड गिरावट का सबसे बड़ा कारण क्या है?
जवाब: कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और डॉलर की मजबूती मुख्य कारण हैं।
सवाल: क्या रुपया 100 प्रति डॉलर तक पहुंच सकता है?
जवाब: विशेषज्ञों के अनुसार, वैश्विक हालात खराब रहे तो यह संभव है।
सवाल: कमजोर रुपये का आम लोगों पर क्या असर होगा?
जवाब: पेट्रोल, डीजल और आयातित सामान महंगे हो सकते हैं।
Prem Chand | Suryoday Samachar

