चित्र में फ्यूजेरियम विल्ट से प्रभावित केला पौधा, जंगली कैल्कटा 4 किस्म और जेनेटिक रिसर्च की प्रयोगशाला दिखाई गई है।जंगली केले में मिला पनामा रोग से बचाव जीन, खेती को नई उम्मीद।

दुनिया भर में केले की खेती पर फ्यूजेरियम विल्ट यानी पनामा रोग का खतरा लगातार बढ़ रहा है। खासकर कैवेंडिश किस्म इस बीमारी से बुरी तरह प्रभावित होती है। ऐसे समय में वैज्ञानिकों ने पनामा रोग से बचाव जीन की पहचान कर बड़ी सफलता हासिल की है।

शोध में पाया गया कि जंगली केले की एक उपप्रजाति ‘कैलकत्ता 4’ में प्राकृतिक रूप से पनामा रोग से बचाव जीन मौजूद है। यह जीन फ्यूजेरियम विल्ट सब-ट्रॉपिकल रेस 4 (STR4) के खिलाफ सुरक्षा देता है। वैज्ञानिकों ने इस किस्म को संवेदनशील पौधों के साथ क्रॉस कर डीएनए विश्लेषण किया और क्रोमोसोम 5 पर इस जीन का सटीक स्थान चिन्हित किया।

विशेषज्ञों का मानना है कि यह खोज टिकाऊ खेती की दिशा में अहम कदम है। भविष्य में इस पनामा रोग से बचाव जीन की मदद से ऐसी नई केले की किस्में विकसित की जा सकती हैं, जो स्वादिष्ट भी हों और रोग से सुरक्षित भी।

Jai Sharma | Suryoday Samachar

FAQ

प्रश्न 1: पनामा रोग क्या है?
यह मिट्टी जनित फफूंद रोग है, जो केले के पौधे को मुरझाकर नष्ट कर देता है।

प्रश्न 2: पनामा रोग से बचाव जीन क्यों महत्वपूर्ण है?
यह जीन पौधों को फ्यूजेरियम विल्ट से प्राकृतिक सुरक्षा देता है।

प्रश्न 3: क्या इससे बाजार में नया केला आएगा?
वैज्ञानिक भविष्य में सुरक्षित और स्वादिष्ट नई किस्में विकसित करने की योजना बना रहे हैं।

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