भारतीय रक्षा तकनीक से लैस वायु अस्त्र-1 लोइटरिंग म्यूनिशन का परीक्षण करते सुरक्षा विशेषज्ञों का प्रतीकात्मक दृश्य।पोखरण में परीक्षण के दौरान वायु अस्त्र-1 ड्रोन सिस्टम

भारत की रक्षा तकनीक लगातार मजबूत हो रही है। इसी कड़ी में पुणे की रक्षा कंपनी निबे लिमिटेड ने “वायु अस्त्र-1” का सफल परीक्षण कर बड़ी उपलब्धि हासिल की है। इस अत्याधुनिक लोइटरिंग म्यूनिशन सिस्टम ने राजस्थान के पोखरण और उत्तराखंड के जोशीमठ (मलारी) में अपनी क्षमता साबित की। “वायु अस्त्र-1” ने 100 किलोमीटर दूर मौजूद लक्ष्य को बेहद सटीकता के साथ निशाना बनाया। कंपनी के अनुसार इसकी CEP क्षमता एक मीटर से कम रही। यह सिस्टम रात के अंधेरे में भी दुश्मन के टैंक और सैन्य ठिकानों पर हमला करने में सक्षम है।

परीक्षण के दौरान “वायु अस्त्र-1” ने 14 हजार फीट से अधिक ऊंचाई पर 90 मिनट से ज्यादा समय तक उड़ान भरी। कठिन मौसम और पहाड़ी परिस्थितियों में भी इसने मिशन को सफलतापूर्वक पूरा किया। रक्षा विशेषज्ञ इसे भारतीय सेना के लिए बड़ा गेम चेंजर मान रहे हैं। इस सिस्टम में इन्फ्रारेड कैमरा और आधुनिक सेंसर लगाए गए हैं। यही वजह है कि यह रात में भी बेहद सटीक निशाना लगा सकता है। कंपनी ने बताया कि यह सिस्टम मिशन के दौरान हमला रोककर दोबारा अटैक करने की क्षमता भी रखता है। भारत सरकार आत्मनिर्भर रक्षा उत्पादन पर जोर दे रही है। ऐसे में “वायु अस्त्र-1” जैसे स्वदेशी सिस्टम भारतीय सेना की ताकत को नई ऊंचाई दे सकते हैं।

FAQ

Q1. वायु अस्त्र-1 क्या है?

वायु अस्त्र-1 एक अत्याधुनिक लोइटरिंग म्यूनिशन यानी आत्मघाती ड्रोन सिस्टम है।

Q2. वायु अस्त्र-1 की मारक क्षमता कितनी है?

यह सिस्टम 100 किलोमीटर दूर तक लक्ष्य को निशाना बना सकता है।

Q3. वायु अस्त्र-1 का परीक्षण कहां हुआ?

इसका परीक्षण पोखरण और जोशीमठ (मलारी) क्षेत्र में किया गया।

Q4. वायु अस्त्र-1 की सबसे बड़ी खासियत क्या है?

यह रात में भी सटीक हमला कर सकता है और 14 हजार फीट ऊंचाई पर ऑपरेशन करने में सक्षम है।

Jai Sharma | Suryoday Samachar

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