South China Sea :- अमेरिका, ब्रिटेन और 12 अन्य पश्चिमी एवं एशियाई देशों ने संयुक्त बयान जारी कर दक्षिण चीन सागर में चीन के व्यापक समुद्री दावों को 2016 के अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता न्यायाधिकरण के फैसले के आधार पर अवैध बताया है। इन 14 देशों ने कहा कि वे क्षेत्र में ऐसी किसी भी कार्रवाई को स्वीकार नहीं करते जो क्षेत्रीय शांति, स्थिरता और अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यवस्था के लिए खतरा पैदा करती हो।

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संयुक्त बयान में कहा गया कि विवादित जलक्षेत्र में तनाव बढ़ाने वाली और “अस्थिरता पैदा करने वाली” गतिविधियां अंतरराष्ट्रीय कानून की भावना के विपरीत हैं। देशों ने सभी पक्षों से संयुक्त राष्ट्र समुद्री कानून (UNCLOS) और नियम-आधारित अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था का सम्मान करने की अपील की।

इसी मुद्दे पर 27 सदस्यीय यूरोपीय संघ (EU) ने भी अलग बयान जारी करते हुए वर्ष 2016 के मध्यस्थता फैसले को “विवादों के शांतिपूर्ण समाधान की दिशा में एक ऐतिहासिक निर्णय” बताया। यूरोपीय संघ ने कहा कि समुद्री विवादों का समाधान अंतरराष्ट्रीय कानून और संवाद के माध्यम से होना चाहिए।

गौरतलब है कि 2016 में हेग स्थित स्थायी मध्यस्थता न्यायाधिकरण (PCA) ने फिलीपींस की याचिका पर फैसला सुनाते हुए दक्षिण चीन सागर में चीन के कई दावों को कानूनी आधारहीन माना था। हालांकि, चीन ने उस फैसले को स्वीकार नहीं किया और लगातार उसे खारिज करता रहा है।

दक्षिण चीन सागर दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है। इस क्षेत्र में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव पर अंतरराष्ट्रीय समुदाय लगातार नजर बनाए हुए है।

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