Attaullah Khan Esakhelvi :- 80 और 90 के दशक में जब कैसेट संस्कृति अपने चरम पर थी, तब पाकिस्तानी लोक एवं ग़ज़ल गायक अताउल्लाह खान एसाखेलवी की आवाज़ भारत के करोड़ों संगीत प्रेमियों के दिलों पर राज करती थी। खासकर उत्तर प्रदेश और बिहार की गलियों, कस्बों और गांवों में उनके दर्द भरे गीतों की ऐसी लोकप्रियता थी कि ऑटो-रिक्शा, रोडवेज बस, ट्रक, रेलवे स्टेशन और चाय की दुकानों तक उनकी आवाज़ सुनाई देती थी।
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अताउल्लाह खान के गीतों की सबसे बड़ी खासियत उनकी सादगी, दर्द और लोक शैली थी। प्यार, बिछड़ने और जुदाई पर आधारित उनके गानों ने आम लोगों की भावनाओं को गहराई से छुआ। यही वजह रही कि सीमाओं से परे भारत में भी उन्होंने बड़ी पहचान बनाई।
उनके कई लोकप्रिय गीत आज भी पुराने संगीत प्रेमियों की पसंद बने हुए हैं। कैसेट और सीडी के दौर में उनके एल्बम रिकॉर्ड बिक्री करते थे और छोटे शहरों से लेकर ग्रामीण इलाकों तक उनकी जबरदस्त मांग रहती थी। उस दौर में उनके गीतों ने भारतीय संगीत बाजार में अलग पहचान बनाई।
संगीत विशेषज्ञों का मानना है कि अताउल्लाह खान ने लोक संगीत और दर्द भरी गायकी को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया। उनकी आवाज़ आज भी पुरानी यादों को ताज़ा कर देती है और नई पीढ़ी सोशल मीडिया के माध्यम से उनके गीतों को सुन रही है.
