भारत की राजनीति में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है, क्योंकि केंद्र सरकार परिसीमन 2026 के जरिए चुनावी ढांचे को नया रूप देने की तैयारी कर रही है। संसद के विशेष सत्र में इस विषय पर महत्वपूर्ण बिल पेश किए जाएंगे, जिससे लोकसभा सीटों के बंटवारे में बदलाव संभव है।
सरकारी सूत्रों के अनुसार, इस बार परिसीमन 2026 केवल 2011 की जनगणना पर आधारित नहीं होगा। इसके बजाय एक नया फॉर्मूला लागू किया जाएगा, जिसमें सभी राज्यों को समान रूप से लाभ देने का प्रयास किया जाएगा। इस प्रक्रिया के तहत लोकसभा सीटों में करीब 50% तक बढ़ोतरी का प्रस्ताव है।
उदाहरण के तौर पर उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल जैसे बड़े राज्यों में सीटों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हो सकती है। वहीं तमिलनाडु और केरल जैसे दक्षिणी राज्यों को भी इस नए मॉडल में फायदा मिलने की बात कही जा रही है।
हालांकि विपक्ष ने परिसीमन 2026 का विरोध किया है। उनका कहना है कि इससे कुछ राज्यों का प्रतिनिधित्व प्रभावित हो सकता है। वहीं सरकार का दावा है कि यह कदम देश में संतुलित प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करेगा।
Jai Sharma | Suryoday Samachar
FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले सवाल)
प्रश्न 1: परिसीमन 2026 क्या है?
उत्तर: यह लोकसभा और विधानसभा क्षेत्रों की सीमाओं को फिर से तय करने की प्रक्रिया है।
प्रश्न 2: क्या सीटों की संख्या बढ़ेगी?
उत्तर: हां, परिसीमन 2026 के तहत सीटों में 50% तक बढ़ोतरी का प्रस्ताव है।
प्रश्न 3: क्या सभी राज्यों को फायदा होगा?
उत्तर: सरकार के अनुसार, सभी राज्यों को इस नए फॉर्मूले से लाभ मिलेगा।

