कुकरैल वन क्षेत्र में प्रस्तावित नाइट सफारी का हरित और आधुनिक दृश्य, जहां पर्यावरण सुरक्षा के साथ पर्यटन विकसित किया जाएगा।लखनऊ में प्रस्तावित कुकरैल नाइट सफारी परियोजना का सांकेतिक दृश्य।

राजधानी Lucknow में प्रस्तावित कुकरैल नाइट सफारी परियोजना एक बार फिर चर्चा में है। 13 मई को सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की अहम सुनवाई होनी है। माना जा रहा है कि कोर्ट से मंजूरी मिलने के बाद इस बहुप्रतीक्षित परियोजना का काम शुरू हो सकता है।योगी सरकार इस परियोजना को देश की पहली और दुनिया की पांचवीं नाइट सफारी के रूप में विकसित करना चाहती है। फिलहाल ऐसी नाइट सफारी Singapore, Thailand, China और Indonesia में मौजूद हैं।

केंद्रीय अधिकार प्राप्त समिति (सीईसी) पहले ही अपनी रिपोर्ट सुप्रीम कोर्ट को सौंप चुकी है। रिपोर्ट में पर्यावरण सुरक्षा के साथ परियोजना को सैद्धांतिक मंजूरी दी गई है। हालांकि कुछ सख्त शर्तें भी रखी गई हैं। इनमें कम पेड़ों की कटाई, कम रोशनी, सीमित वाहन संचालन और शोर पर नियंत्रण शामिल है।सरकार ने संकेत दिए हैं कि वह सभी शर्तों को मानने के लिए तैयार है। ऐसे में उम्मीद बढ़ गई है कि सुप्रीम कोर्ट परियोजना को हरी झंडी दे सकता है। इससे लखनऊ में पर्यटन और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।

FAQ

Q1. कुकरैल नाइट सफारी कहां बनेगी?

यह परियोजना लखनऊ के कुकरैल वन क्षेत्र में प्रस्तावित है।

Q2. सुनवाई कब होगी?

इस मामले की सुनवाई 13 मई को सुप्रीम कोर्ट में होगी।

Q3. परियोजना की खास बात क्या है?

यह भारत की पहली नाइट सफारी बन सकती है।

Q4. सीईसी ने क्या शर्तें रखी हैं?

पर्यावरण सुरक्षा, कम रोशनी और सीमित निर्माण जैसी शर्तें रखी गई हैं।

Prem Chand | Suryoday Samachar

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