फर्जी NGO, दस्तावेजों और बैंक ट्रांजेक्शन से जुड़ी धोखाधड़ी को दर्शाती प्रतीकात्मक फोटोउदयपुर NGO ठगी मामले में जाली दस्तावेज और बैंक फ्रॉड का प्रतीकात्मक दृश्य

राजस्थान के उदयपुर में सामने आई उदयपुर NGO ठगी ने सभी को चौंका दिया है। इस मामले में एक महिला पर आरोप है कि उसने अपने पति के जाली हस्ताक्षर कर NGO के नाम पर करीब 1.5 करोड़ रुपये का फर्जीवाड़ा किया। बताया जा रहा है कि इस पूरे खेल में महिला ने अपने भाई और कुछ साथियों का भी साथ लिया।पीड़ित अनूप आमेरिया, जो पेट्रोल पंप व्यवसायी हैं, ने बताया कि उन्हें कई साल तक इस उदयपुर NGO ठगी की जानकारी नहीं मिली।

आरोप है कि उनकी पत्नी ने घर से जरूरी दस्तावेज हासिल किए और उन्हीं का इस्तेमाल कर ‘कोड ऑर्गेनाइजेशन’ नाम से एक फर्जी संस्था बनाई। इस संस्था के जरिए अलग-अलग बैंकों में खाते खोले गए और लाखों रुपये का लेन-देन किया गया।जानकारी के मुताबिक, ICICI Bank, Yes Bank और Baroda Rajasthan Kshetriya Gramin Bank में खाते खोलकर पैसे ट्रांसफर किए गए। इसके अलावा, फर्जी दस्तावेजों के जरिए सरकारी अनुदान और वर्क ऑर्डर भी हासिल किए गए।मामले के खुलासे के बाद पुलिस ने जांच शुरू कर दी है और आरोपियों से पूछताछ जारी है। इस उदयपुर NGO ठगी में धोखाधड़ी, गबन और आपराधिक साजिश जैसी धाराएं लगाई गई हैं।

FAQ (अक्सर पूछे जाने वाले सवाल)
Q1. उदयपुर NGO ठगी क्या है?
यह जाली हस्ताक्षरों के जरिए NGO के नाम पर की गई करोड़ों की धोखाधड़ी है।
Q2. इस मामले में कितनी रकम शामिल है?
करीब 1 से 1.5 करोड़ रुपये के लेन-देन की बात सामने आई है।
Q3. आरोपियों ने कौन सा तरीका अपनाया?
फर्जी दस्तावेज, बैंक खाते और सरकारी अनुदान का गलत इस्तेमाल किया गया।
Q4. क्या पुलिस जांच चल रही है?
हाँ, पुलिस ने मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।

Prem Chand | Suryoday Samachar

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