“प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को दिल्ली के विज्ञान भवन में 98वें अखिल भारतीय मराठी साहित्य सम्मेलन का उद्घाटन किया। यह पहली बार है जब यह प्रतिष्ठित साहित्यिक सम्मेलन महाराष्ट्र के बाहर दिल्ली में आयोजित किया गया है। 21 से 23 फरवरी तक चलने वाले इस तीन दिवसीय सम्मेलन का उद्देश्य मराठी साहित्य की समृद्ध विरासत को बढ़ावा देना और समकालीन साहित्यिक प्रवृत्तियों पर चर्चा करना है।“
मराठी साहित्य में स्वतंत्रता संग्राम की महक: पीएम मोदी
उद्घाटन समारोह में पीएम मोदी ने मराठी भाषा और साहित्य की समृद्धि की सराहना की और इसे भारत की सांस्कृतिक धरोहर का अभिन्न हिस्सा बताया। उन्होंने कहा:
“अखिल भारतीय मराठी साहित्य सम्मेलन केवल एक भाषा या राज्य तक सीमित आयोजन नहीं है। इस सम्मेलन में स्वतंत्रता संग्राम की महक है, इसमें महाराष्ट्र और राष्ट्र की सांस्कृतिक विरासत का गौरव है।”
पीएम मोदी ने महान संत ज्ञानेश्वर का उल्लेख करते हुए कहा कि मराठी भाषा अमृत से भी अधिक मधुर है। उन्होंने कहा कि मराठी भाषा और संस्कृति के प्रति उनका विशेष प्रेम है और वे मराठी भाषा को सीखने और बोलने का प्रयास हमेशा करते रहते हैं।
भाषा केवल संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि संस्कृति की संवाहक: पीएम मोदी
पीएम मोदी ने भाषाओं के महत्व पर बल देते हुए कहा:
“भाषा केवल संवाद का माध्यम नहीं होती, बल्कि यह हमारी संस्कृति की संवाहक होती है। मराठी ने महाराष्ट्र और राष्ट्र के अनगिनत विचारकों को अभिव्यक्ति देकर हमारे सांस्कृतिक निर्माण में योगदान दिया है।”
उन्होंने इस बात पर चिंता जताई कि कई बार भाषा के नाम पर भेदभाव और राजनीति की जाती है, लेकिन भारत की भाषाई विरासत इन भ्रांतियों को दूर करने में सक्षम है। उन्होंने कहा कि भाषाओं को समृद्ध करना और उन्हें अपनाना हम सभी का दायित्व है।
मराठी में उच्च शिक्षा को मिलेगा बढ़ावा
पीएम मोदी ने कहा कि सरकार सभी भारतीय भाषाओं को समान महत्व दे रही है। मराठी भाषा को मुख्यधारा में लाने के लिए शिक्षा नीति में बदलाव किए गए हैं। अब महाराष्ट्र के छात्र मराठी में उच्च शिक्षा, इंजीनियरिंग और मेडिकल की पढ़ाई कर सकेंगे। उन्होंने कहा कि अंग्रेजी न जानने की वजह से किसी भी प्रतिभाशाली छात्र के साथ अन्याय नहीं होने दिया जाएगा।
सम्मेलन में कई दिग्गज हस्तियां हुईं शामिल
उद्घाटन समारोह में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, एनसीपी (सपा) प्रमुख शरद पवार, प्रसिद्ध मराठी लेखिका तारा भवालकर और सम्मेलन की अध्यक्ष उषा तांबे भी उपस्थित थीं। इस दौरान पीएम मोदी को विशेष रूप से सम्मानित किया गया।
मराठी साहित्य सम्मेलन: एक गौरवशाली परंपरा
अखिल भारतीय मराठी साहित्य सम्मेलन का इतिहास 1878 से जुड़ा हुआ है, जब न्यायमूर्ति महादेव गोविंद रानाडे ने इसे पुणे में शुरू किया था। 1954 में, भारत के पहले प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने इस सम्मेलन के उद्घाटन समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में भाग लिया था।
98वां अखिल भारतीय मराठी साहित्य सम्मेलन भारत की बहुभाषी और बहुसांस्कृतिक पहचान को और मजबूत बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है। यह सम्मेलन मराठी साहित्य और भाषा के वैश्विक विस्तार का मंच भी बना है। प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में मराठी समेत अन्य भारतीय भाषाओं को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने के प्रयास किए जा रहे हैं।
