भारत ने वन्यजीव संरक्षण और पारंपरिक जीवनशैली को सम्मान देने की दिशा में एक अनूठा कदम उठाया है। तमिलनाडु के नीलगिरी जिले में स्थित मुदुमलाई टाइगर रिजर्व के थेप्पाकाडु हाथी शिविर में देश का पहला “महावत विलेज” विकसित किया गया है। यह परियोजना न केवल हाथियों के रखवालों को सम्मान देती है बल्कि उनके जीवन की गुणवत्ता को भी बेहतर बनाती है।

क्या है महावत विलेज?

महावत विलेज एक विशेष आवासीय परिसर है जिसे विशेष रूप से हाथियों की देखभाल करने वाले महावतों के लिए बनाया गया है। 5.6 करोड़ रुपये की लागत से तैयार इस परियोजना में 44 पक्के घर बनाए गए हैं। इनमें पेयजल, शौचालय, बच्चों के लिए खेल का मैदान जैसी सभी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध हैं। हर घर को किसी दिवंगत हाथी के नाम पर समर्पित किया गया है, जो वहां वर्षों तक सेवा करता रहा।

मुदुमलाई टाइगर रिजर्व की विशेषता

681 वर्ग किलोमीटर में फैला मुदुमलाई टाइगर रिजर्व हाथी, बाघ, तेंदुआ, भालू और हिरण जैसे कई महत्वपूर्ण वन्यजीवों का घर है। यहां का थेप्पाकाडु हाथी शिविर एशिया का सबसे पुराना शिविर माना जाता है, जिसकी स्थापना ब्रिटिश काल में हुई थी। शुरू में इसका उपयोग जंगली हाथियों को पकड़ने और लकड़ी ढोने के लिए किया जाता था।

हाथियों की वर्तमान स्थिति और कुम्की सिस्टम

वर्तमान में थेप्पाकाडु शिविर में 27 हाथी हैं। इनमें से 20 हाथी ‘कुम्की’ के रूप में काम करते हैं। कुम्की हाथियों को विशेष रूप से प्रशिक्षित किया जाता है ताकि वे जंगली हाथियों को मानव बस्तियों से दूर रख सकें। ये हाथी भारत के दक्षिणी राज्यों तमिलनाडु, कर्नाटक, केरल और आंध्र प्रदेश की सीमा पर गश्त में काम आते हैं।

महावतों की भूमिका और समुदाय

शिविर में 22 हाथी इकाइयां हैं और प्रत्येक के साथ एक महावत नियुक्त है। ये महावत तमिलनाडु वन विभाग के कर्मचारी हैं और इरुलर, वेत्ताक, कुरुम्बर और कट्टुनायक्कर जैसे पारंपरिक आदिवासी समुदायों से ताल्लुक रखते हैं। ये लोग पीढ़ियों से हाथियों की देखभाल कर रहे हैं। पहले इन्हें अस्थायी और जर्जर आवासों में रहना पड़ता था, लेकिन अब उन्हें पक्के मकान मिलने से उनके जीवन में स्थायित्व आया है।

महावत विलेज के सामाजिक और पर्यावरणीय लाभ

यह परियोजना महज एक आवास सुविधा नहीं, बल्कि सामाजिक समावेश और पारंपरिक ज्ञान के संरक्षण की दिशा में एक प्रेरणादायक कदम है। इससे वन्यजीव संरक्षण में लगे महावतों को सम्मान मिला है और उनकी मेहनत को राष्ट्रीय स्तर पर सराहा गया है।

पर्यटन को मिलेगा बढ़ावा

वन विभाग ने हाथियों को खाना खिलाने का अनुभव पर्यटकों के लिए भी खोला है। अब पर्यटक हर सुबह और शाम हाथियों के भोजन के समय उन्हें नजदीक से देख सकते हैं। इससे क्षेत्र में ईको-टूरिज्म को भी बढ़ावा मिलेगा और स्थानीय लोगों को रोजगार के अवसर मिलेंगे।

भविष्य की योजनाएं

राज्य सरकार और वन विभाग इस परियोजना को आदर्श बनाकर देश के अन्य हिस्सों में भी ऐसी योजनाएं शुरू करने की दिशा में विचार कर रहे हैं। साथ ही, इस गांव में बच्चों के लिए शिक्षा, स्वास्थ्य और डिजिटल सेवाओं की सुविधा भी विकसित करने की योजना है।

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