“कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय द्वारा मंगलवार को जारी आंकड़ों के अनुसार, खरीफ फसलों की बुवाई इस वर्ष अब तक तेजी से आगे बढ़ रही है। 13 जून 2025 तक खरीफ फसलों का कुल बुवाई क्षेत्र 89.29 लाख हेक्टेयर तक पहुंच गया, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि में यह 87.81 लाख हेक्टेयर था। 1.48 लाख हेक्टेयर की यह वृद्धि मौजूदा सीजन की मजबूत शुरुआत का संकेत है।“
धान की बुवाई में वृद्धि
- धान की रोपाई अब तक 4.53 लाख हेक्टेयर में हो चुकी है
- पिछले साल यही आंकड़ा 4.00 लाख हेक्टेयर था
- मानसून की अच्छी शुरुआत ने इसमें सकारात्मक योगदान दिया है
दालों की बुवाई में उत्साहजनक रुझान
- उड़द, मूंग जैसी दालों का बुवाई क्षेत्र बढ़कर 3.07 लाख हेक्टेयर
- पिछले वर्ष था 2.6 लाख हेक्टेयर
- 0.49 लाख हेक्टेयर की वृद्धि शुरुआती चरण में ही एक शुभ संकेत
तिलहन और मोटे अनाजों में उछाल
- तिलहनों का बुवाई क्षेत्र 2.05 लाख हेक्टेयर (पिछले साल: 1.5 लाख हेक्टेयर)
- मोटे अनाज जैसे ज्वार, बाजरा, रागी का क्षेत्र 5.89 लाख हेक्टेयर तक पहुंचा
- बेहतर मानसून से असिंचित क्षेत्रों में बुवाई आसान हुई
असिंचित कृषि भूमि पर निर्भरता
- भारत की लगभग 50% कृषि भूमि असिंचित श्रेणी में आती है
- यहां मानसून ही प्रमुख सिंचाई स्रोत होता है
- इसलिए अच्छी वर्षा फसल उत्पादन और खाद्य सुरक्षा के लिए अनिवार्य है
MSP में बढ़ोतरी: किसानों को मिलेगा बेहतर मूल्य
- 28 मई 2025 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति ने
14 खरीफ फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) में बढ़ोतरी को मंजूरी दी - इसका उद्देश्य:
- किसानों को लाभकारी मूल्य दिलाना
- उत्पादन को प्रोत्साहन देना
- खाद्य मुद्रास्फीति को संतुलित रखना
खरीफ फसलों की बुवाई 2025 की शुरुआत उत्साहजनक रही है। मानसून की अनुकूल स्थिति और MSP में समय पर वृद्धि से कृषि क्षेत्र को मजबूती मिल रही है। यह रुझान किसानों की आय बढ़ाने और देश की खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में एक अहम कदम है।
