“कैंसर का इलाज दुनिया की सबसे जटिल चिकित्सा चुनौतियों में से एक रहा है। खासतौर पर जब एक ही ट्यूमर में कई तरह की कोशिकाएं मौजूद हों — जिसे वैज्ञानिक भाषा में ट्यूमर हेटेरोजेनेटी (Tumor Heterogeneity) कहा जाता है। अब इसी चुनौती से निपटने के लिए ऑस्ट्रेलिया और अमेरिका के वैज्ञानिकों ने मिलकर एक नया आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) टूल – ‘AA-Net’ तैयार किया है।“
क्या है ट्यूमर हेटेरोजेनेटी और क्यों है यह इलाज में बड़ी रुकावट?
एक ट्यूमर में मौजूद सभी कोशिकाएं एक जैसी नहीं होतीं।
- कुछ कोशिकाएं इलाज के प्रति संवेदनशील होती हैं और जल्दी खत्म हो जाती हैं।
- वहीं कुछ प्रतिरोधक क्षमता वाली होती हैं, जो इलाज से बच जाती हैं और बाद में कैंसर की पुनरावृत्ति का कारण बनती हैं।
अब तक डॉक्टर ट्यूमर को एक समान इकाई मानकर इलाज करते थे, जिससे पूर्ण उपचार में बाधा आती थी।
“यह एक ऐसी अदृश्य दीवार थी जिसे पार करना मुश्किल था,” – क्रिस्टीन चैफर, गारवन इंस्टीट्यूट
AA-Net: एक टूल जो हर कोशिका को व्यक्तिगत रूप से परखता है
AI आधारित यह टूल:
- ट्यूमर की हर कोशिका की जीन अभिव्यक्ति (Gene Expression) को गहराई से स्कैन करता है।
- यह प्रत्येक कोशिका की संरचना, कार्य और प्रतिक्रिया को समझता है।
- कोशिकाओं को अलग-अलग श्रेणियों में वर्गीकृत करता है, जिससे चिकित्सकों को यह समझने में मदद मिलती है कि कौन-सी कोशिका कैसे प्रतिक्रिया देगी।
इसका उद्देश्य एक सटीक और व्यक्तिगत चिकित्सा पद्धति (Precision Oncology) को साकार करना है।
कौन बना रहा है यह तकनीक?
प्रमुख वैज्ञानिक और संस्थान:
- गारवन इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल रिसर्च, ऑस्ट्रेलिया
- येल स्कूल ऑफ मेडिसिन, अमेरिका
इस तकनीक की सह-निर्माता डॉ. स्मिता कृष्णास्वामी (एसोसिएट प्रोफेसर, येल यूनिवर्सिटी) ने कहा:
“यह पहली तकनीक है जो कोशिकाओं की जटिलता को उपयोगी और समझने योग्य रूप में बदल सकती है।“
“यह कैंसर की चिकित्सा को व्यक्ति विशेष की जरूरतों के अनुरूप ढालने की दिशा में एक बड़ा कदम है।“
शोध का परिणाम: एक ही ट्यूमर में 5 प्रकार की कोशिकाएं पाई गईं
AA-Net के ज़रिए किए गए विश्लेषण से सामने आया:
- एक ही ट्यूमर में 5 अलग-अलग प्रकार की कोशिकाएं थीं।
- प्रत्येक कोशिका में विकास, फैलाव और प्रतिरोध की क्षमता अलग-अलग थी।
- इस विविधता को समझने से इलाज की रणनीति को अनुकूलित (customize) किया जा सकता है।
कैंसर डिस्कवरी में प्रकाशित हुआ अध्ययन
यह शोध प्रतिष्ठित वैज्ञानिक जर्नल Cancer Discovery में प्रकाशित हुआ है। अध्ययन के अनुसार:
- स्तन कैंसर पर यह तकनीक बेहद सफल रही है।
- यह प्रणाली भविष्य में फेफड़े, लिवर, ब्लड कैंसर और यहां तक कि ऑटोइम्यून बीमारियों में भी फायदेमंद हो सकती है।
प्रिसिजन ऑन्कोलॉजी: चिकित्सा का भविष्य
प्रिसिजन ऑन्कोलॉजी का अर्थ है:
- “वन-साइज-फिट्स-ऑल” इलाज की बजाय व्यक्तिगत जीनोमिक प्रोफाइल के आधार पर इलाज तय करना।
- AA-Net जैसे टूल इस विचार को प्रयोग से व्यवहार में बदलने में मदद कर सकते हैं।
फायदे: क्या बदलेगा कैंसर चिकित्सा में?
| पहलू | पारंपरिक इलाज | AA-Net आधारित इलाज |
|---|---|---|
| ट्यूमर की समझ | सामूहिक स्तर पर | व्यक्तिगत कोशिकाओं तक |
| इलाज की दिशा | सामान्य | व्यक्तिगत और लक्षित |
| उपचार की सफलता | सीमित | अधिक संभावना |
| पुनरावृत्ति का खतरा | अधिक | कम |
भविष्य की दिशा: क्या हो सकता है अगला कदम?
- क्लिनिकल परीक्षण में इस तकनीक का विस्तार
- ऑटोइम्यून रोग, जैसे ल्यूपस, मल्टीपल स्क्लेरोसिस में उपयोग
- AI टूल्स को अस्पतालों में इंटीग्रेट करना
“यह तकनीक चिकित्सा को एक नई दृष्टि दे सकती है – जहां मशीन, कोशिका की भाषा समझे और डॉक्टर मरीज के इलाज को बारीकी से निर्देशित करे,” – डॉ. चैफर
