एमएसएमई दिवस 2025 के अवसर पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने देशभर से आए उद्यमियों को संबोधित करते हुए कहा कि भारत की आर्थिक प्रगति में सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (MSME) की भूमिका अत्यंत महत्वपूर्ण है। उन्होंने इन उद्यमों को भारत की अर्थव्यवस्था का मजबूत स्तंभ बताया जो ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार, नवाचार, और सस्टेनेबल विकास को बढ़ावा देते हैं।

एमएसएमई का योगदान: अर्थव्यवस्था और रोजगार में अहम भूमिका

राष्ट्रपति ने कहा कि:

  • एमएसएमई कम पूंजी में अधिक रोजगार उत्पन्न करते हैं।
  • ये उद्यम ग्रामीण और पिछड़े इलाकों में सशक्तिकरण और समावेशी विकास के वाहक हैं।
  • एमएसएमई GDP में अहम योगदान देने के साथ-साथ स्थानीय संसाधनों का उपयोग कर नवाचार को बढ़ावा देते हैं।

राष्ट्रपति ने गिनाईं एमएसएमई सेक्टर की प्रमुख चुनौतियाँ

हालांकि इस क्षेत्र का योगदान सराहनीय है, लेकिन राष्ट्रपति मुर्मु ने कहा कि एमएसएमई को कई चुनौतियों का सामना करना पड़ता है:

  • वित्त की कमी
  • बड़ी कंपनियों से प्रतिस्पर्धा
  • प्रौद्योगिकी की उपलब्धता में कमी
  • कच्चे माल और कुशल मानव संसाधन की कमी
  • सीमित बाजार और विलंबित भुगतान

इन समस्याओं के समाधान के लिए केंद्र सरकार की कई योजनाएं एवं पहलें सक्रिय हैं।

सरकारी योजनाएं और नीतिगत पहलें

राष्ट्रपति ने बताया कि केंद्र सरकार ने एमएसएमई की बेहतरी के लिए कई कदम उठाए हैं:

  1. एमएसएमई वर्गीकरण मानदंडों में संशोधन
    – उद्यमों की परिभाषा में बदलाव करके उन्हें अधिक लाभकारी योजनाओं का लाभ मिल सके।
  2. क्रेडिट और ऋण की सुविधा में सुधार
    – बैंकों और वित्तीय संस्थानों से कर्ज लेना सरल हुआ है।
  3. खरीद अनिवार्यता में वृद्धि
    – सभी केंद्रीय मंत्रालयों और सार्वजनिक उपक्रमों को 35% तक खरीद एमएसएमई से करने के लिए प्रोत्साहन दिया जा रहा है।
  4. PM विश्वकर्मा योजना
    – कारीगरों के कौशल विकास और वित्तीय समर्थन के लिए एक समर्पित योजना।
  5. पंजीकृत एमएसएमई की संख्या में तेज वृद्धि
    – डिजिटल पंजीकरण की सुविधा से कई नए उद्यम जुड़ रहे हैं।

विलंबित भुगतान समाधान के लिए ऑनलाइन पोर्टल

राष्ट्रपति ने भरोसा जताया कि हाल ही में लॉन्च किया गया ऑनलाइन विवाद समाधान पोर्टल (ODR) एमएसएमई के लिए विलंबित भुगतानों के समाधान में अहम भूमिका निभाएगा।

  • यह पोर्टल तेज़, पारदर्शी और लागत प्रभावी समाधान प्रदान करेगा।
  • इससे छोटे उद्यमों की तरलता और स्थिरता बनी रहेगी।

नवाचार ही एमएसएमई की आत्मा है

राष्ट्रपति मुर्मु ने जोर देते हुए कहा कि:

एमएसएमई क्षेत्र का स्थायित्व तभी संभव है जब वह नवाचार को अपनाए। स्थानीय संसाधनों से जुड़ी समस्याओं का समाधान वहीं से निकल सकता है।

उन्होंने नवाचार को स्थानीय विकास और वैश्विक प्रतिस्पर्धा में सफलता की कुंजी बताया।

महिलाओं की बढ़ती भागीदारी से बढ़ेगा देश का विकास

राष्ट्रपति ने विशेष रूप से महिलाओं की बढ़ती भागीदारी की प्रशंसा की:

  • हाल के वर्षों में महिला उद्यमियों की संख्या में वृद्धि हुई है।
  • उन्होंने युवतियों से आह्वान किया कि वे उद्यमिता में कदम रखें और आत्मनिर्भर भारत का हिस्सा बनें

महिलाओं की सहभागिता के बिना देश का सर्वांगीण विकास संभव नहीं है,” — द्रौपदी मुर्मु

समावेशी विकास की दिशा में बड़ा कदम

एमएसएमई सेक्टर:

  • विकास का विकेंद्रीकरण करता है
  • वंचित तबकों को मुख्यधारा में लाता है
  • स्थानीय अर्थव्यवस्था को सशक्त करता है

राष्ट्रपति ने कहा कि एक मजबूत और समर्थ एमएसएमई इकोसिस्टम भारत को एक सस्टेनेबल और समावेशी विकास पथ पर अग्रसर करेगा।

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