“उत्तर प्रदेश सरकार ने पर्यावरण संरक्षण और ग्रामीण रोजगार सृजन के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक पहल करते हुए मनरेगा (महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना) के तहत 12.50 करोड़ से अधिक पौधों के मेगा प्लांटेशन का अभियान शुरू किया है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में शुरू हुआ यह अभियान हरियाली, मातृत्व सम्मान और रोजगार के तीन स्तंभों पर आधारित है।“
‘एक पेड़ मां के नाम 2.0’ – भावनात्मक जुड़ाव के साथ पर्यावरण बचाने की कोशिश
इस वर्ष का पौधरोपण अभियान विशेष रूप से ‘एक पेड़ मां के नाम 2.0’ थीम पर आधारित है। इसका उद्देश्य सिर्फ पेड़ लगाना नहीं, बल्कि समाज को ‘मातृ वंदना’ से भावनात्मक रूप से जोड़ते हुए पर्यावरण के प्रति जागरूक करना है।
लोगों से यह अपील की जा रही है कि वे हर पौधे को अपनी मां के नाम पर लगाएं और उसकी देखभाल उसी तरह करें जैसे वे अपनी मां की करते हैं। यह अभियान केवल सरकारी पहल नहीं, एक जनआंदोलन बनने की ओर अग्रसर है।
लखीमपुर खीरी को मिला सबसे बड़ा लक्ष्य
पूरे प्रदेश में लखीमपुर खीरी को पौधरोपण के लिए सबसे बड़ा लक्ष्य सौंपा गया है। यहां 42 लाख पौधे लगाए जाएंगे।
इसके बाद सोनभद्र को दूसरा और हरदोई को तीसरा सबसे बड़ा लक्ष्य मिला है।
इन जिलों का चयन वहां की जलवायु, भौगोलिक स्थिति और जमीन की उपलब्धता के आधार पर किया गया है। इससे पौधों की जीवित रहने की संभावना अधिक है।
1.89 लाख से अधिक स्थलों पर होगा पौधरोपण
इस विशाल अभियान के लिए 1.89 लाख से अधिक स्थलों को चिन्हित किया गया है।
इन स्थानों पर मिट्टी, नमी, वर्षा और सूरज की रोशनी को ध्यान में रखते हुए विभिन्न प्रजातियों के पौधे लगाए जाएंगे जैसे:
- नीम
- पीपल
- बरगद
- सहजन
- आम
- बेल
- अर्जुन
यह सुनिश्चित किया जाएगा कि हर पौधा उस क्षेत्र की जैव विविधता और पर्यावरण संतुलन में योगदान दे।
रोजगार सृजन और ग्रामीण भागीदारी
मनरेगा योजना का प्रमुख उद्देश्य ग्रामीणों को स्थानीय स्तर पर रोजगार देना है। इस अभियान में ग्रामीणों की भागीदारी से उन्हें स्थायी रोजगार मिलेगा।
- पौधरोपण कार्य
- सिंचाई और देखभाल
- प्लॉट की सफाई और तैयारी
- ट्री गार्ड निर्माण
- निगरानी और सर्वेक्षण
हर कार्य की निगरानी ग्राम पंचायत और ग्राम्य विकास विभाग द्वारा की जाएगी।
सहजन पौधों की विशेष पहल – पोषण के साथ पर्यावरण संरक्षण
इस अभियान की एक विशेष विशेषता है – प्रधानमंत्री ग्रामीण आवास योजना के लाभार्थियों को दो-दो सहजन के पौधे देना।
सहजन (Drumstick/Moringa) में औषधीय गुणों के साथ-साथ भरपूर पोषण होता है। यह पहल ग्रामीण परिवारों की पोषण सुरक्षा और स्वास्थ्य सुधार की दिशा में बड़ा कदम है।
ग्राम्य विकास विभाग को सौंपी गई बड़ी जिम्मेदारी
इस मेगा प्लांटेशन अभियान को सफल बनाने की जिम्मेदारी ग्राम्य विकास विभाग को सौंपी गई है। विभाग द्वारा तैयार की गई कार्य योजना में शामिल हैं:
- पौधों का समय पर वितरण
- स्थल पर बाड़बंदी और सुरक्षा
- पौधों की सिंचाई व्यवस्था
- ग्राम स्तर पर निगरानी टीमें
- मोबाइल एप से रियल-टाइम ट्रैकिंग
सिर्फ रोपण नहीं, सुरक्षा और संरक्षण भी ज़रूरी
सरकार ने स्पष्ट किया है कि अभियान की सफलता केवल रोपण तक सीमित नहीं रहेगी।
देखभाल, सिंचाई और सुरक्षा के अभाव में रोपे गए पौधे जीवित नहीं रहेंगे। इसलिए विशेष जोर दिया गया है:
- 100 दिन तक नियमित सिंचाई
- ट्री गार्ड की अनिवार्यता
- स्थानीय नागरिकों की जिम्मेदारी तय करना
- पंचायत स्तर पर निगरानी समितियों का गठन
पर्यावरण, रोजगार और सामाजिक भावनाओं का संगम
यह अभियान एक समग्र दृष्टिकोण से चलाया जा रहा है जिसमें:
- पर्यावरण सुरक्षा – बढ़ती गर्मी और जलवायु परिवर्तन से निपटने के लिए
- रोजगार सृजन – ग्रामीणों को आय का स्रोत
- भावनात्मक जुड़ाव – ‘मां के नाम’ से संवेदनशीलता का संचार
योगी सरकार द्वारा शुरू किया गया यह वृक्षारोपण अभियान उत्तर प्रदेश को एक हरित और टिकाऊ राज्य की दिशा में ले जा सकता है।
‘एक पेड़ मां के नाम 2.0’ जैसी थीम आम जनमानस को जोड़ती है और उन्हें इस अभियान का सहभागी बनाती है।
अब ज़रूरत है कि हम सब मिलकर इस कार्य को सफल बनाएं, ताकि पर्यावरण बचे, गांव हरे-भरे रहें और हर व्यक्ति को उसका हकदार रोजगार मिले।
