वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सोमवार को लोकसभा में जानकारी दी कि सरकार की विभिन्न आर्थिक नीतियों और योजनाओं के चलते देश में बेरोजगारी और महंगाई दर 2025 में पिछले छह वर्षों के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गई है।

बेरोजगारी दर घटकर 3.2% हुई

वित्त मंत्री ने बताया कि:

  • वर्ष 2018-19 में बेरोजगारी दर 6% थी।
  • 2024-25 में यह घटकर 3.2% रह गई है।
  • यह 6 वर्षों में सबसे कम है।

रोजगार बढ़ाने के लिए उठाए गए ठोस कदम

सरकार ने रोजगार सृजन के लिए कई योजनाएं लागू कीं, जिनमें प्रमुख हैं:

  • प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम
  • आत्मनिर्भर भारत रोजगार योजना
  • मनरेगा (MGNREGA)
  • राष्ट्रीय शहरी/ग्रामीण आजीविका मिशन
  • कौशल विकास योजनाएं
  • उद्योगों को रोजगार आधारित प्रोत्साहन
  • ग्रामीण समृद्धि और लचीलापन कार्यक्रम – विशेषकर महिलाओं, युवाओं और सीमांत किसानों के लिए

महंगाई दर में बड़ी गिरावट: अब 2.1% पर

वित्त मंत्री के अनुसार, उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) के आधार पर खुदरा महंगाई दर:

  • 2023-24 में: 5.4%
  • 2024-25 में: 4.6%
  • 2025-26 की पहली तिमाही में: औसतन 2.7%
  • जून 2025 में: 2.1%, जो 6 वर्षों में सबसे कम

महंगाई नियंत्रण के लिए उठाए गए प्रमुख कदम

सरकार ने निम्न उपायों के जरिए महंगाई पर नियंत्रण पाया:

  • खाद्य वस्तुओं का बफर स्टॉक बढ़ाना
  • खुले बाजार में रणनीतिक अनाज बिक्री
  • आयात को बढ़ावा और निर्यात पर रोक
  • स्टॉक लिमिट और मूल्य नियंत्रण उपाय
  • भारत ब्रांड के तहत सस्ती दरों पर खुदरा बिक्री
  • 81 करोड़ लोगों को मुफ्त खाद्यान्न वितरण (PMGKAY योजना)

कर छूट से मध्यम वर्ग को राहत

वित्त मंत्री ने यह भी बताया कि आयकर छूट सीमा को बढ़ाकर लोगों की डिस्पोजेबल इनकम में वृद्धि की गई:

  • अब सालाना ₹12 लाख तक की आय (वेतनभोगियों के लिए ₹12.75 लाख तक) कर-मुक्त है।
  • इसका असर खपत बढ़ाने और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को प्रोत्साहित करने में हुआ है।

‘ग्रामीण समृद्धि और लचीलापन’ कार्यक्रम की शुरुआत

2025-26 के बजट में घोषित यह नई योजना:

  • कृषि आधारित रोजगार को बढ़ावा देती है
  • महिलाओं, युवाओं और छोटे किसानों को केंद्र में रखती है
  • तकनीक, निवेश और स्किल के ज़रिए स्थायी विकास की ओर बढ़ती है

इन सुधारों से भारत को क्या मिला?

  • बेरोजगारी और महंगाई में ऐतिहासिक कमी
  • ग्रामीण और शहरी क्षेत्र में रोजगार के अवसरों में वृद्धि
  • मध्यम वर्ग और गरीब तबकों को प्रत्यक्ष राहत
  • भारतीय अर्थव्यवस्था में विश्वास और स्थायित्व

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