बांग्लादेश के पूर्व मुख्य न्यायाधीश एबीएम खैरुल हक को गुरुवार सुबह उनके धनमंडी स्थित आवास से गिरफ्तार कर लिया गया। गिरफ्तारी की पुष्टि ढाका मेट्रोपॉलिटन पुलिस की जासूसी शाखा (डीबी) ने की है।

डीबी के संयुक्त आयुक्त मोहम्मद नसीरुल इस्लाम के अनुसार, खैरुल हक के खिलाफ कई मामले दर्ज हैं, और उन्हें पूछताछ के लिए मिंटो रोड स्थित डीबी मुख्यालय ले जाया गया है।

कौन हैं एबीएम खैरुल हक?

  • एबीएम खैरुल हक ने 2010 में बांग्लादेश के 19वें मुख्य न्यायाधीश के रूप में पदभार ग्रहण किया था।
  • वह 67 वर्ष की अनिवार्य सेवानिवृत्ति आयु पर पिछले वर्ष सेवा से निवृत्त हुए।
  • वर्ष 2013 में उन्हें लॉ कमीशन का चेयरमैन नियुक्त किया गया था, और बाद में पुनः नियुक्ति भी मिली।

खैरुल हक की गिरफ्तारी के पीछे के आरोप क्या हैं?

लोकतंत्र और न्यायपालिका को कमजोर करने का आरोप

बीएनपी समर्थक वकीलों के समूहबांग्लादेश जातीयतावादी ऐनजीबी फोरम (BJA)’ ने अप्रैल 2024 में खैरुल हक के खिलाफ:

  • लोकतंत्र को कमजोर करने
  • न्यायिक स्वतंत्रता को खत्म करने
  • एकपक्षीय शासन को समर्थन देने

जैसे आरोपों में गिरफ्तारी की मांग की थी।

एडवोकेट जैनुल आबेदीन का बयान

BJA फोरम के अध्यक्ष एडवोकेट जैनुल आबेदीन ने खैरुल हक को लेकर कहा:

“पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने न्यायपालिका के समर्थन से फासीवादी शासन स्थापित किया। अगर खैरुल हक ने संवैधानिक जिम्मेदारी निभाई होती, तो लोकतंत्र को नहीं रोका जा सकता था।”

उन्होंने खैरुल हक को सीधे तौर पर लोकतंत्र के पतन और न्यायपालिका की निष्क्रियता का जिम्मेदार ठहराया।

अब तक क्यों नहीं हुई थी कानूनी कार्रवाई?

जैनुल आबेदीन का आरोप है कि:

  • खैरुल हक पर इतने गंभीर आरोप होने के बावजूद, उन पर कोई कानूनी कार्रवाई या गिरफ्तारी नहीं हुई।
  • बांग्लादेश की जनता उन्हें जवाबदेह ठहराना चाहती है, लेकिन लंबे समय से राजनीतिक संरक्षण के कारण वे कार्रवाई से बचते रहे।

गिरफ्तारी की संवेदनशीलता और राजनीतिक पृष्ठभूमि

यह गिरफ्तारी राजनीतिक दृष्टिकोण से अत्यंत संवेदनशील मानी जा रही है, क्योंकि:

  • खैरुल हक को शेख हसीना सरकार का करीबी माना जाता रहा है।
  • उन्होंने संवैधानिक सुधारों के जरिए राजनीतिक संतुलन को प्रभावित करने का प्रयास किया था, ऐसा विपक्ष का आरोप है।
  • अब जब राजनीतिक माहौल गर्म है, यह गिरफ्तारी न्यायिक और राजनीतिक शक्ति संघर्ष का प्रतीक बन सकती है।

खैरुल हक की गिरफ्तारी केवल एक कानूनी कार्रवाई नहीं है, बल्कि यह बांग्लादेश की न्यायिक और लोकतांत्रिक व्यवस्था में संभावित बदलाव की शुरुआत भी हो सकती है।

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