हेनले पासपोर्ट इंडेक्स 2025 की रिपोर्ट सामने आ चुकी है और इस बार भारत ने वैश्विक स्तर पर अपनी स्थिति में बड़ी छलांग लगाई है। जहां भारत अब 77वें स्थान पर पहुंच गया है, वहीं पाकिस्तान दुनिया के सबसे कमजोर पासपोर्ट्स में बना हुआ है।

🇮🇳 भारत की रैंकिंग में 8 स्थानों की वृद्धि

भारत अब 77वें स्थान पर पहुंच चुका है, जबकि छह महीने पहले वह 85वें स्थान पर था।
भारतीय पासपोर्ट धारकों को अब 62 देशों में वीज़ा-मुक्त या वीजा ऑन अराइवल की सुविधा मिलती है।

भारत की प्रगति के प्रमुख कारण:

  • विदेश मंत्रालय की राजनयिक सक्रियता
  • वीजा समझौतों में तेजी
  • वैश्विक सहयोग और पर्यटन को बढ़ावा

🇵🇰 पाकिस्तान का पासपोर्ट फिर सबसे कमजोर में शामिल

पाकिस्तान की रैंकिंग गिरकर 96वें स्थान पर पहुंच गई है।
पाकिस्तानी पासपोर्ट केवल 32 देशों में वीजा-मुक्त यात्रा की सुविधा देता है, जो कि युद्धग्रस्त देशों जैसे अफगानिस्तान, सीरिया और यमन से ही थोड़ा बेहतर है।

लगातार गिरती स्थिति के कारण:

  • कमजोर राजनयिक संबंध
  • वैश्विक सुरक्षा चिंताएं
  • सीमित अंतरराष्ट्रीय पहुंच

टॉप पासपोर्ट्स 2025: सिंगापुर सबसे ऊपर

हेनले पासपोर्ट इंडेक्स 2025 के मुताबिक:

रैंकदेशवीजा-मुक्त या ऑन-अराइवल देश
1सिंगापुर195 देश
2जापान, दक्षिण कोरिया194 देश
3फ्रांस, जर्मनी, इटली, आयरलैंड, डेनमार्क, फिनलैंड, स्पेन193 देश
4ऑस्ट्रिया, बेल्जियम, स्वीडन, नीदरलैंड, लक्जमबर्ग192 देश
5न्यूजीलैंड, ग्रीस, स्विट्जरलैंड191 देश

🇺🇸🇬🇧 अमेरिका और ब्रिटेन की रैंकिंग में गिरावट

  • अमेरिका एक स्थान गिरकर 10वें स्थान पर पहुंचा
  • ब्रिटेन भी फिसलकर 6ठे स्थान पर आ गया

यह गिरावट दर्शाती है कि अंतरराष्ट्रीय संबंधों में स्थायित्व और वीजा नीतियां कितनी अहम होती हैं।

🇸🇦 सऊदी अरब और UAE ने किया चौंकाने वाला प्रदर्शन

सऊदी अरब:

  • वीजा-मुक्त पहुंच में सबसे तेज़ सुधार
  • कई नए द्विपक्षीय समझौते और खुलेपन की नीति

संयुक्त अरब अमीरात (UAE):

  • 10 वर्षों में 42वें से 8वें स्थान पर पहुंचा
  • 34 स्थान की छलांग के साथ टॉप 10 में शामिल

🇨🇳 चीन ने भी रैंकिंग में दर्ज की बड़ी प्रगति

  • 94वें स्थान से बढ़कर 60वें स्थान पर पहुंचा
  • हालांकि, अभी भी शेंगेन देशों के लिए वीजा-मुक्त प्रवेश नहीं मिला है

पासपोर्ट रैंकिंग 2025 न केवल देशों की वैश्विक छवि, बल्कि उनके राजनयिक रिश्तों और वीजा नीतियों का भी प्रतीक है।

भारत की छलांग एक संकेत है कि देश वैश्विक यात्राओं और निवेश के लिए अधिक ओपन होता जा रहा है। वहीं, पाकिस्तान जैसी स्थिति बताती है कि कमजोर अंतरराष्ट्रीय संबंध कैसे वैश्विक गतिशीलता को बाधित करते हैं।

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